प्रभु प्यारे से जिसका संबंध है

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प्रभु प्यारे से जिसका सम्बन्ध है।

उसे हर दम आनन्द ही आनन्द है ।।

झूठी ममता का करके किनारा,

ले के सच्चे प्रभु का सहारा ।

जो उसकी रजा में रजामन्द है ।। १ ।। 

जिसकी कथनी में कोयल – सी चहक है । 

जिसकी करनी में फूलों – सी महक है । 

प्रेम नरमी ही जिसकी सुगन्ध है ।।२ ।। 

निन्दा चुगली ना जिसको सुहाए । 

बुरी संगत की रंगत ना भाए ।

सत संगत ही जिसको पसन्द है ।। ३ ।। 

दीन दुःखियों के दुःख जो मिटाए ।

बन के सेवक भला सबका चाहे । 

नहीं जिसमें घमण्ड और पाखण्ड है ।। ४ ।। 

 

तुम्हारे दिव्य दर्शन की इच्छा में लेके आया हूं

 

 

तव वन्दन हे नाथ करें हम ।

 

 

हे प्रभु हम तुमसे वर पाएं

 

 

ओम बोल मेरी रचना घड़ी घड़ी

 

 

बेला अमृत गया आलसी सो रहा

 

 

उठ जाग मुसाफिर भोर भई अब रैन कहां जो सोवत है

 

 

अमृत वेला जाग अमृत बरस रहा

 

 

प्रातः कालीन गीत , जाग गए अब सोना क्या रे

 

 

राष्ट्रगान आ ब्रह्मन् ब्राह्मणो ब्रह्मवर्चसी जायताम् ।

 

 

राष्ट्रगान आ ब्रह्मन् ब्राह्मणो ब्रह्मवर्चसी जायताम् ।

 

 

 

 

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