प्रातः कालीन गीत , जाग गए अब सोना क्या रे

प्रातः कालीन गीत    जाग गए अब सोना क्या रे ।।    जो नर तन देवन को दुर्लभ । सो पाया अब रोना क्या रे।।१ ।।    हीरा हाथ अमोलक आया । काँच भाव से खोना क्या रे || २ ||    जब वैराग्य ज्ञान घिर आया । तब चाँदी अरु सोना क्या रे || … Continue reading प्रातः कालीन गीत , जाग गए अब सोना क्या रे