अमृत वेला जाग अमृत बरस रहा

अमृत वेला जाग अमृत बरस रहा । छोड़ नींद का राग अमृत बरस रहा ।।    चार बजे के पीछे सोना , है अपने जीवन को खोना ।  झट खटिया को त्याग , अमृत बरस रहा।।१ ।।    नीरस जीवन में रस भर ले , धार धर्म भवसागर तर ले ।  त्यज मिथ्या अनुराग , … Continue reading अमृत वेला जाग अमृत बरस रहा