उठ जाग मुसाफिर भोर भई अब रैन कहां जो सोवत है

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उठ जाग मुसाफिर भोर भई , अब रैन कहाँ जो सोवत है ?

जो सोवत है सो खोवत है , जो जागत है सो पावत है ।।

 

टुक नींद से अखियाँ खोल जरा , और अपने प्रभु से ध्यान लगा । 

यह प्रीत करन की रीत नहीं , प्रभु जागत है तू सोवत है ( १ ) 

 

जो कल करना है आज कर ले , जो आज करना है अब कर ले । 

जब चिड़ियों ने चुग खेत लिया , तब पछताए क्या होवत है ( २ ) 

 

नादान भुगत करनी अपनी ऐ पापी पाप में चैन कहाँ । 

जब पाप की गठरी शीश धरी , फिर शीश पकड़ क्यों रोवत है ( ३ ) 

 

 

अमृत वेला जाग अमृत बरस रहा

 

प्रातः कालीन गीत , जाग गए अब सोना क्या रे

 

ओ३म् ध्वजगान

 

https://aryaveerdal.in/category/arya-veer-dal-gitanjali/

 

यह ओ३म का झंडा आता है

 

राष्ट्रगान आ ब्रह्मन् ब्राह्मणो ब्रह्मवर्चसी जायताम् ।

 

 

राष्ट्रगान आ ब्रह्मन् ब्राह्मणो ब्रह्मवर्चसी जायताम् ।

 

 

 

 

 

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