ओम बोल मेरी रचना घड़ी घड़ी

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ओ३म् बोल मेरी रसना घड़ी – घड़ी ।। 

सकल काम तज , ओ३म् नाम भज । 

मुख मण्डल में पड़ी – पड़ी ।।१ ।। 

ओ३म् नाम सर्वोत्तम प्रभु का । 

कहे वेद की कड़ी कड़ी ।।२ ।। 

पूर्ण ब्रह्म करेंगे पूरण । 

सब आशाएँ बड़ी – बड़ी ।। ३ ।। 

पल – पल में ले जाना चाहती । 

मौत सिरहाने खड़ी खड़ी ।।४ ।। 

हरा भरा हो जाए जीवन । 

लगे ओ३म् की झड़ी झड़ी ।।५ ।।

 

बेला अमृत गया आलसी सो रहा

 

उठ जाग मुसाफिर भोर भई अब रैन कहां जो सोवत है

 

अमृत वेला जाग अमृत बरस रहा

 

प्रातः कालीन गीत , जाग गए अब सोना क्या रे

 

ओ३म् ध्वजगान

 

यह ओ३म का झंडा आता है

 

राष्ट्रगान आ ब्रह्मन् ब्राह्मणो ब्रह्मवर्चसी जायताम् ।

 

 

आर्य वीर दल ध्वज गान

 

 

राष्ट्रगान आ ब्रह्मन् ब्राह्मणो ब्रह्मवर्चसी जायताम् ।

 

 

 

 

 

 

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