हे प्रभु हम तुमसे वर पाएं

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 ध्येय गीत ( प्रात : यज्ञ के समय ) 

 

ओ३म् इन्द्रं वर्धन्तो अप्तुरः कृण्वन्तो विश्वमार्यम् अपघ्नन्तो अराव्णः ।। 

 

 सा रे गा मा पा धा सा रे सा रे गा रे सा । 

 नि सा रे सा नि धा पा पा धा मा पा धा मा पा गा रे सा रे सा

 

 हे प्रभो ! हम तुम से वर पाएँ । 

 सकल विश्व को आर्य बनाएँ ।। 

 

फैलें सुख सम्पत्ति फैलाएँ । 

आप बढ़ें तव राज्य बढ़ाएँ ।।१ ।। 

 

हे प्रभो ! राग द्वेष को दूर भगाएँ ।

प्रीति रीति की नीति चलाएँ।।२ ।। हे प्रभो ! 

 

ओम बोल मेरी रचना घड़ी घड़ी

 

बेला अमृत गया आलसी सो रहा

 

उठ जाग मुसाफिर भोर भई अब रैन कहां जो सोवत है

 

अमृत वेला जाग अमृत बरस रहा

 

प्रातः कालीन गीत , जाग गए अब सोना क्या रे

 

ओ३म् ध्वजगान

 

यह ओ३म का झंडा आता है

 

राष्ट्रगान आ ब्रह्मन् ब्राह्मणो ब्रह्मवर्चसी जायताम् ।

 

 

आर्य वीर दल ध्वज गान

 

राष्ट्रगान आ ब्रह्मन् ब्राह्मणो ब्रह्मवर्चसी जायताम् ।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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