आत्मरक्षा लड़कियों के लिए – पुस्तक

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आज लड़कियाँ प्रत्येक क्षेत्र में पुरुषों से स्पर्धा कर रही हैं। अनेक कार्यों के लिये उन्हें बाहर भी जाना होता है। कई बार रात्रि में उन्हें घर पहुंचने में विलम्ब भी हो जाता है। माता-पिता तथा उन्हें स्वयं भी किसी अनहोनी घटना का भय बना रहता है। इस परिस्थिति में उन्हें सम्मानपूर्वक जीने और अपने कार्य निर्भीक होकर करने के लिये स्वयं पुरुषार्थ करना होगा। महिलाओं में साहस पुरुषों से आठ गुणा होता है। जब वे दुर्गा एवं चण्डी का रूप धारण कर लेती हैं तो बड़े-बड़ों के छक्के छूट जाते हैं।

सम्मानपूर्वक जीने का एक ही उपाय है कि लड़कियाँ अपनी सुरक्षा के लिये स्वयं ही कटिबद्ध होकर आत्मरक्षा एवं शारीरिक क्षमता बढ़ाने का प्रशिक्षण प्राप्त करें। इसके लिये लड़कियों को विद्यार्थी जीवन में ही आत्मरक्षा का प्रशिक्षण लेना होगा। अबला के स्थान पर सबला बनना होगा जिससे वे किसी भी का सामना धैर्य से कर सकें।

प्रस्तुत पुस्तक में इसी उद्देश्य को ध्यान में रख कर आत्मरक्षा की सरल एवं प्रभावशाली तकनीकों को चित्रों के साथ समझाने का प्रयत्न किया है जिनके अनुसार कोई भी स्वयं अभ्यास कर सम्भावित विपत्ति का सामना साहस के साथ कर सकती है। इसमें निहत्थे आक्रमणकारी से अपनी सुरक्षा, सशस्त्र आक्रमण से उपलब्ध साधनों द्वारा सुरक्षा एवं बलात्कार जैसी त्रासदी से अपने को सुरक्षित रखते हुये बच निकलना तथा अन्य सावधानियाँ रखने का विस्तार से वर्णन किया है।

आज समय बदल गया है। पुरातन समय में स्त्रियों की रक्षा माता-पिता, पति, पुत्र एवं अन्य जन करते थे। परन्तु अब लोग दर्शक बन कर देखते रहते हैं। आज मानवता एवं सम्वेदना लुप्त प्रायः हो गई है। इस विकट परिस्थिति में स्त्रियों को आत्मरक्षा स्वयं ही करनी होगी। मुझे विश्वास है कि यह आत्मरक्षा का प्रशिक्षण उनमें साहस एवं आत्मविश्वास की भावना का विकास कर उन्हें आगे बढ़ने का मार्ग प्रशस्त करेगा।

  • स्वामी देवव्रत

यह पुस्तक आर्य वीर/वीरांगना दल राष्ट्रीय शिविर में उपलब्ध रहेगा मूल्य ₹100

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