स्वामी देवव्रत सरस्वती

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जीवन

जीवन परिचय

आज उनके जन्मदिवस पर कुछ लेख👇

डॉ स्वामी देवव्रत सरस्वती

नामडॉक्टर स्वामी देवव्रत सरस्वती

पिता का नाममहाशय उमराव सिंह

माता का नाम बसंती देवी

जन्मतिथि 13/02/1943

आयु 80

धर्मवैदिक

विषय Asian military science of India

कार्यक्षेत्र कलात्मक

ग्राम दड़ौली

जिला रेवाड़ी

राज्य हरियाणा

देश भारत

वर्तमान निवास

आर्ष योग संस्थान, फैजपुर माजरा, नीमका, सेक्टर 76 फरीदाबाद हरियाणा

पिन कोड121004

मोबाइल नंबर

ईमेल

वेबसाइट dhanurveda.in

यूट्यूब dhanurved

फेसबुकSwami Devvrat ji follower

इंस्टाग्रामSwami Devvrat ji follower

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शिक्षा :-

1. 1960 पंजाब विश्वविद्यालय चंडीगढ़

2. व्याकरणाचार्य , दर्शनाचार्य, महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय रोहतक हरियाणा

देव

3. विद्यावारिधि पीएचडी राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान नई दिल्ली

5. व्यायाम विशारद व्यायाम पारंगत (हनुमान व्यायाम प्रसारक मंडल अमरावती)

6.DYSD कैवल्यधाम लोनावाला जिला पुणे महाराष्ट्र

रजिस्टर्ड वैद्य

कार्यक्षेत्र

सन 1965 से योग एवं भारतीय व्यायाम, आसन, प्राणायाम, दंड बैठक, मल्लख्म्भ, लाठी, भाला, परशु , छुरीका, धनुर्विद्या एवं नियुद्धम् का प्रशिक्षण उत्तर भारत के सभी गुरुकुलो में देना प्रारंभ किया। तब से लेकर अभी तक 80 वर्ष की आयु में भी युवक-युवतियों को इन विद्याओं का प्रशिक्षण दे रहे हैं । इसके अतिरिक्त हरियाणा ,दिल्ली, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, बंगाल, उड़ीसा, कर्नाटक, पंजाब, छत्तीसगढ़, उत्तराखंड, और असम इत्यादि प्रांतों में गत 50 वर्षों से शिविरों के माध्यम से हजारों युवक-युवतियों को भारतीय व्यायाम योग एवं शस्त्र विद्या का प्रशिक्षण देते आ रहे हैं ।

स्वामी रामदेव ने भी इनसे योग एवं भारतीय व्यायाम का प्रशिक्षण प्राप्त किया है । इनके द्वारा प्रशिक्षित अनेक युवक देश-विदेश में योगासन प्राणायाम एवं भारतीय व्यायाम का प्रशिक्षण दे रहे हैं ।

सार्वदेशिक आर्य वीर दल

डॉक्टर स्वामी देवव्रत सरस्वती

के आप सन् 1988-90 तक उप-प्रधान संचालक तथा सन् 1991 ई.से अक्तूबर 2018ई. तक प्रधान संचालक/प्रधान सेनापति रहे । वर्तमान में आप संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं । सार्वदेशिक आर्य वीर दल के माध्यम सेपिछले 30 वर्षों से महर्षि दयानन्द सरस्वती के युवा निर्माण आह्वान को दृष्टिगत कर युवा पीढ़ी को संस्कारित एवं प्रशिक्षित करने का अभियान चला रहे हैं। सामाजिक पाखण्डके आप मुखर विरोधी हैं।

विदेशों में प्रचार

डॉ देवव्रत आचार्य जी ने नीदरलैंड, दक्षिण अफ्रीका, थाईलैंड, सिंगापुर, नेपाल, और म्यांमार में योग का प्रचार किया है। आप आर्य वीर दल के माध्यम से गत 50 वर्षों से भारतीय व्यायाम योग एवं शस्त्र विद्या का प्रशिक्षण देते आ रहे हैं। इस वर्ष भी ग्रीष्मकालीन अवकाश में देश के विभिन्न प्रांतों में लगभग 100 शिविरों में आचार्य जी एवं उनके शिष्यों ने 8000 युवक-युवतियों को प्रशिक्षण दिया है । डॉ देवव्रत आचार्य शस्त्र के साथ शास्त्र , वेद, दर्शन, उपनिषद, रामायण, महाभारत, व्याकरण के विद्वान हैं।

उनके द्वारा निम्न साहित्य प्रकाशित हुआ है

धनुर्वेद

प्राचीन भारतीय अस्त्र-शस्त्र के आप एकमात्र अधिकृत विद्वान हैं । आपने चारों वेदों का अध्ययन करके यजुर्वेद के उपवेद धनुर्वेद जो विलुप्त प्राय हो गया था उसका संकलन विविध ग्रंथों से करके उसे पाठ्यपुस्तक के रूप में मुद्रित किया है। जिसमें धनुर्विद्या चक्र, भाला , तलवार, छुरीका, गदा एवं न्युध्दम् इन सात प्रकार के योद्धाओ का चित्रों के माध्यम से क्रियात्मक वर्णन किया है। इसके दो संस्करण मुद्रित हो चुके हैं। इसकी प्रशंसा विद्वानों ने मुक्त कंठ से की है। धनुर्वेद का यह अद्वितीय ग्रंथ है ।

अष्टांग योग

इसमें महर्षि पतंजलि के आठों योग के अंगों का वैज्ञानिक अध्ययन एवं शारीरिक मानसिक रोगों की चिकित्सा के अतिरिक्त धारणा ध्यान समाधि सचित्र वर्णन क्रियात्मक विधि से किया गया है। इसके 9 सस्करण प्रकाशित हो चुके हैं।

योगासन

विद्यार्थियों के लिए योगासन प्राणायाम एवं इस आयु में होने वाले रोगों तथा स्मरण शक्ति की वृद्धि के लिए योग के उपाय बताए हैं

वेद स्वाध्याय

पृष्ठ संख्या 550 इसमें चारों वेदों के चुने हुए 364 वेद मंत्रों की व्याख्या सरल हिंदी भाषा में की गई है प्रतिदिन स्वाध्याय के लिए यह पुस्तक उपयोगी है ।

व्याख्यान शतक

भारतीय व्यायाम

पृष्ठ संख्या 450 इस पुस्तक में प्राचीन एवं अर्वाचीन भारतीय दंड बैठक मल्लख्म्भ , मुद्गर , डंबल, लेजियम, जोड़ी, बांस ड्रिल, एवं सर्वांग सुंदर व्यायाम, के प्रथम भाग में तथा द्वितीय भाग में प्राचीन शस्त्र , लाठी, भाला, परशु, तलवार छुरी, पट्टा इत्यादि सचित्र वर्णन किया गया है ।

आत्मरक्षा

इसमें इजराइल की संस्था करावा भाग तथा अन्य आत्मरक्षा के आचार्यों के टेक्निकल को हिंदी भाषा में हजारों चित्रों के माध्यम से समझाया गया है। यह पुस्तक लड़कियों के लिए बहुत ही उपयोगी है ।

विद्यार्थियों के लिए लिखी साहित्य

विद्यार्थी जीवन निर्माण

व्यक्तित्व विकास

प्रेरणा

प्रेरक जीवन

योग शिक्षा 4 भाग

न्युध्दम्

संतुलित भोजन

संगीतोपनिषद्

आर्य वीर दल पाठ्यक्रम👇

आर्य वीर दल पाठ्यक्रम 
 

इंटरनेट के द्वारा प्रचार

आर्य संदेश टीवी पर दोपहर 12:30 बजे सायं कालीन 8:00 बजे स्वामी देवव्रत जी के नाम से प्रतिदिन वेद प्रवचन प्रसारित होता है यूट्यूब चैनल पर धनुर्वेद के नाम से सभी भारतीय व्यायाम के वीडियो दिए हैं । इसके अतिरिक्त आसन प्राणायाम धारणा ध्यान के वीडियो भी उपलब्ध है।

यद्यपि 50 वर्षों से आचार्य भारतीय व्यायाम एवं योग का प्रशिक्षण देश विदेश में दे रहे हैं इसलिए कितने लोग इनसे लाभान्वित हुए इसका मूल्यांकन नहीं किया जा सकता। जिस संगठन से वह संबंधित हैं उसके प्रतिवर्ष 100 शिविर लगते हैं। जिनमें 8000 विद्यार्थी भारतीय व्यायाम आसन प्राणायाम शस्त्र विद्या सीखते हैं। और आत्मरक्षा का प्रशिक्षण लेने वालों के गणना अतिरिक्त है। इसके अतिरिक्त योग प्रशिक्षण लेने वालों की गणना अतिरिक्त है इनके द्वारा प्रशिक्षित हजारों युवक-युवतियों देश-विदेश में भारतीय व्यायाम का प्रशिक्षण दे रहे हैं।

स्वामी रामदेव जी ने भी योगासन प्राणायाम और भारतीय व्यायाम का प्रशिक्षण अपने विद्यार्थी काल में इन्हीं से प्रशिक्षण प्राप्त किया है। यूट्यूब पर इनका धनुर्वेद के नाम से चैनल है। जिसमें इनके व्यायामओ को देखने वालों की संख्या लाखों में है । आर्य संदेश टीवी चैनल पर प्रतिदिन मध्यान्ह 12:30 बजे सायं 8:00 इनका प्रवचन वर्षों से प्रसारित हो रहा है। धनुर्वेद का प्रकाशन बहुत बड़ी उपलब्धि है। जिसे देखकर कोई भी अपने प्राचीन युद्ध विधवाओं पर गर्व कर सकता है। शोधार्थियों ने इसे आधार बनाकर शोध पत्रक पीएचडी के लिए लिखा है।

अष्टांग योग

अष्टांग योग

वैज्ञानिक विवेचन एवं चिकित्सा भी बहुत महत्वपूर्ण पुस्तक है हिंदी भाषा में यह अपने आप में अद्वितीय पुस्तक है। डॉ देवव्रत आचार्य जी का कार्यक्षेत्र अधिकतर युवकों में ही रहा है। इनके शिविरों में प्रातः 4:00 बजे से 10:00 बजे तक अनुशासन वध शारीरिक और नैतिक शिक्षा शिष्टाचार सदाचार का प्रशिक्षण दिया जाता है। जिस में प्रशिक्षित युवकों को पुलिस एवं सेना में सरलता से प्रवेश मिल जाता है। इसके अतिरिक्त वह अनेक दूर व्यसनों से भी मुक्त रहते हैं।

मान्यवर डॉ स्वामी देवव्रत आचार्य संस्कृत भाषा के पंडित, वेदों के गंभीर चिंतक , अष्टांग योग के ख्याति प्राप्त आचार्य और समस्त भारत में धनुर्वेद के जानने वाले एकमात्र विद्वान हैं। आप गत 60 वर्षों से युवक-युवतियों को भारतीय व्यायाम, आसन, दंड बैठक, सूर्य नमस्कार, मल्लख्म्भ और आत्मरक्षा के लिए प्राचीन भारतीय मार्शल आर्ट, तलवार, भाला, लाठी, परशु, छुरी, धनुर्विद्या, तथा जूडो कराटे का प्रशिक्षण दे रहे हैं । इनके द्वारा लिखित साहित्य में अष्टांग योग ,वेद स्वाध्याय, व्याख्यान शतक, भारतीय व्यायाम, आत्मरक्षा, अद्वितीय पुस्तक है।

आपने धनुर्वेद के संदर्भों को एकत्रित कर उन्हें क्रिया विधि सहित पाठ्यपुस्तक के रूप में मुद्रित कराया है। जो भी भारत के प्राचीन अस्त्र-शस्त्र विज्ञान के एकमात्र निधि है। इसी विषय को लेकर आपने राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान से विद्यावरिधि पीएचडी की उपाधि प्राप्त की है। आप एकमात्र ऐसे विद्वान है जो शस्त्र और शास्त्र दोनों में निष्णात हैं आपके द्वारा प्रशिक्षित शिष्य देश विदेश में योग भारतीय व्यायाम और धनुर्वेद का प्रशिक्षण दे रहे हैं ऐसे कर्मयोगी सादा जीवन उच्च विचार के धनी श्री डॉक्टर देवव्रत आचार्य जी है।

जैसा कि पहले कहा जा चुका है डॉक्टर स्वामी देवव्रत आचार्य शस्त्र और शास्त्र दोनों के अधिकृत विद्वान हैं जिस धनुर्वेद का प्रशिक्षण लेकर भारतीय योद्धाओं ने चक्रवर्ती राज्य की स्थापना कर सिकंदर सेल्यूकस जैसे यूनानी योद्धाओं को भी भारतीय वीरों का लोहा मानना पड़ा । उस धनुर्वेद को संस्कृत वांग्मय में से चुनकर उन्हें पाठ्यपुस्तक के रूप में विद्वानों के सामने प्रस्तुत किया। यह उनका स्तुति प्रयास है।

विदेशी आक्रांताओं द्वारा तक्षशिला और नालंदा के पुस्तकालयों के जला दिए जाने के कारण धनुर्वेद के मूल ग्रंथ विलुप्त हो गए थे, आचार्य जी ने विशेष परिश्रम करके यत्र तत्र बिखरे हुए स्तंभों को एक माला में पीरों कर उन्हें धनुर्वेद के नाम से सच्चरित्र प्रकाशित किया है। जिसमें सात प्रकार के युद्ध धनुष, चक्र, कुंत खड़क, गदा छुरीका और नियुद्धम् के प्राचीन विधियों को चित्रों के द्वारा स्पष्ट किया है।

यह अभूतपूर्व कार्य है। जो अब तक किसी ने नहीं किया क्योंकि जो संस्कृत के विद्वान हैं वह धनुर्वेद को क्रियात्मक रूप में नहीं जानते हैं। और जो क्रियात्मक रूप से जानते हैं उन्हें शास्त्रों का ज्ञान नहीं है। आचार्य जी की गणना उन विद्वानों में होती है। जो शस्त्र और शास्त्र निष्णात हैं।

यही कारण है कि उनके द्वारा लिखित धनुर्वेद सर्वत्र प्रशंसा का पात्र है। एक परोपकार से उन्हें धनुर्वेद का पुनरुद्धारक कहा जा सकता है। उनके प्रशंसक उन्हें आधुनिक द्रोणाचार्य से संबोधित करते हैं परंतु वह अहंकार भाव से शून्य सतत साधना में रत हैं। प्राचीन अस्त्र-शस्त्र के आप एक मात्र ज्ञाता प्रशिक्षक हैं ।

योग प्रशिक्षण आचार्य देवव्रत जी भारतीय व्यायाम एवं अस्त्र-शस्त्र के अतिरिक्त योग के भी ख्याति प्राप्त प्रशिक्षक हैं योग के अतिरिक्त आयुर्वेद के वैध होने के कारण विभिन्न रोगों की चिकित्सा भी करते हैं इनके आश्रम में प्राकृतिक चिकित्सा और फिजियोथेरेपी के शिविर भी आयोजित किए जाते हैं अष्टांग योग में इन्होंने धारणा ध्यान की 50 विधियों को बहुत ही सरल पद्धति से साध्य साधा है इनके वीडियो बनाकर यूट्यूब पर भी प्रसारित किया गया है ।

नैतिक प्रशिक्षण आचार्य देवव्रत जी प्रतिवर्ष शिविरों के माध्यम से युवक युवतियों को शारीरिक प्रशिक्षण के अतिरिक्त चरित्र निर्माण, व्यक्तित्व विकास, भारतीय संस्कृति के संस्कार और शिष्टाचार सदाचार आदि भी सीखाते हैं इनका कहना है। कि युवक को इस शरीर पर पहला अधिकार राष्ट्र का है दूसरा तुम्हारे माता-पिता का और तीसरा स्थान पर तुम्हारा अधिकार है सबसे बड़ा धर्म राष्ट्र धर्म है। इसलिए राष्ट्र की रक्षा के लिए सदैव तत्पर रहना चाहिए ।

संस्कार

आज का युवा का अपने भारतीय संस्कृति को भूलकर पश्चिम में के अपसंस्कृति एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के कुचक्र में फंसकर अपने प्राचीन विरासत से दूर होता जा रहा है। उन्हें समझा कर अच्छे संस्कार देना ही आचार्य जी का मुख्य उद्देश्य है। उनका कहना है कि एक युवक को सनमार्ग पर लाने से एक घर बसाने का पुण्य मिलता है। स्वयं सन्यासी होते हुए भी उनका प्रयास युवकों को कर्तव्य के प्रति प्रेरित करना ही रहता है ।

व्यक्तित्व

आप सरल स्वभाव सादा जीवन स्पष्ट वक्ता, तपस्वी स्वाध्यायशिल एवं पुरुषार्थी जीवन है ।बिना किसी महत्वकांक्षा के राष्ट्र के युवक-युवतियों के शारीरिक बौद्धिक विकास को समुन्नत कर उन्हें राष्ट्र के लिए समर्पित करना ही मुख्य उद्देश्य है। इसी की पूर्ति के लिए 80 वर्ष की आयु में भी उत्साह के साथ कार्य कर रहे हैं।

सारांश

डॉ देवव्रत आचार्य भारत वर्ष की महानतम विभूति है जिन्होंने सन्यास लेकर समस्त जीवन भारतीय व्यायाम योग धनुर्वेद के प्रशिक्षण में निष्काम भाव से लगा दिया है और अब भी उसी उत्साह से कार्य कर रहे हैं। ऐसी विभूति हमेशा हमारे पथ प्रदर्शक और प्रेरणा के स्रोत रहें।

विभिन्न संस्थानों के द्वारा सम्मान पत्र

*स्वामी देवव्रत सरस्वती जी के जीवनी पर संस्कृत काव्य रचना👇


https://youtu.be/R763JYe9B5E

आचार्य जी से ऐसे ही हमें प्रेरणा मिलती रहे और हमारा मार्गदर्शन करते रहें। रुपेन्द्र आर्य

2 COMMENTS

  1. धर्मेन्द्र जिज्ञासु, महामंत्री आर्य वीर दल हरियाणा प्रांत

    वाह रुपेन्द्र जी, बहुत शानदार और लाजबाव प्रस्तुति।
    बहुत-बहुत शुभकामनाएं जी।

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