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संस्कृति रक्षा -शक्ति संचय -सेवा कार्य

आर्य वीर दल


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इतिहास

आर्यवीर दल : ऐतिहासिक तथ्य

1926 में स्वामी श्रद्धानन्द जी की निर्मम हत्या के उपरान्त, आर्य नेताओं व उत्सवों की सुरक्षा हेतु एक विशेष समर्पित बल की आवश्यकता सर्वत्र महसूस की गई। 1927 में दिल्ली में हुए, प्रथम आर्य महासम्मेलन में महात्मा नारायण स्वामी जी की अध्यक्षता में आर्य रक्षा समिति का गठन किया गया ।


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सेवा कार्य

त्तरकाशी भूकंप 1991, लातूर भूकंप 1993, चमौली भूकंप 1994,
उड़ीसा चक्रवात 1 999, गुजरात भूकंप 2001 और सुनामी 2004 के समय आर्य
समाज से संबंधित किसी भी संगठन द्वारा चलाए गए अब तक के सबसे बड़े संगठित
राहत अभियान, आर्यवीरों की गौरव गाथा कह देते हैं। चाहे भूकंप हो या तूफान, आर्यवीर
दल के प्रशिक्षित आर्यवीर देश पर आने वाली………..


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डॉ स्वामी देवव्रत सरस्वती जी-आधुनिक काल के द्रोणाचार्य

आप आर्यजगत के मूर्धन्य विद्वान, भारतीय व्यायामों के पारंगत प्रशिक्षक तथा
योग के क्षेत्र में ख्याति प्राप्त हैं।आपका जन्म दिनांक 1 3 फरवरी,सन् 1943 ई. को
राव उमराव जी के घर में हुआ |आपने पंजाब विश्वविद्यालय से मैट्रिक,महर्षि दयानन्द
विश्वविद्यालय रोहतक से व्याकरणाचार्य …..और अधिक 

अंतर्राष्ट्रीय आर्य महासम्मेलन 2006 आर्य वीर दल की भूमिका

26 से 29 अक्टूबर 2006 को दिल्ली में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय आर्य महासम्मेलन 2006 में आर्यवीर दल दिल्ली प्रदेश ने पूरे उत्साह से भाग लिया। यद्यपि अधिकतर शक्ति सेवा शिविर में लगी थी, फिर भी सभी आवश्यक कार्यक्रमों में यथासंभव उपस्थित होने के प्रयास किया गया।………और अधिक 

आर्य वीर दल ही क्यूँ ?

जब इस देश में विभिन्न राजनैतिक संगठनों की युवा वर्ग में कार्य करने के
लिए पृथक् इकाइयाँ बनी हुई हैं। इस देश में रहने वाले अधिसंख्य लोग हिन्दू
हैं, जिनका हित चिन्तन करने के लिये अनेक संगठन कार्य कर रहे हैं। उनका
अनुकरण करके अन्य धर्मों के मानने वाले भी अपनी रक्षार्थ सेना बनाने का
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आवश्यकता:

यह प्रश्न पूछना वैसा ही है जैसे कोई किसी माता से पूछे कि
तुम्हें पुत्र की क्या आवश्यकता है? आर्यसमाज हमारी मातृ संस्था है, महर्षि स्वामी दयानन्द गुरु, आचार्य और पितृतुल्य पथ-प्रदर्शक हैं। जिस माता की पवित्र गोद में वेद-मन्त्रों की लोरियाँ सुनकर हमें शान्ति मिली, स्वामीजी के शारीरिक, आत्मिक और सामाजिक ………..और अधिक 

सहयोगी
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