धर्मवीर हकीकत राय

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क्रान्तिवीर पं. रामप्रसाद👇🏻https://aryaveerdal.in/krantiveer-ramprasad/

खंजर से उड़ा दो चाहे, मेरी बोटी-बोटी को।

दूँगा नहीं चोटी को, मैं दूँगा नहीं चोटी को ।।

सबसे प्यारी चीज देखो, हर किसी की जान है।

इस चोटी के बदले मेरी, जान भी कुर्बान है।

पहचान है यह मुझको मैं तो, समझू खरी खोटी को।।१।।

गर्दन के कट जाने से, उतरेगा यह यज्ञोपवीत।

क्योंकि यह हमारी है, पुरानी आर्यों की रीत ।

भयभीत करना चाहते हो तुम, समझ आयु छोटी को ।।२ ।।

क्रांतिवीर ऊधमसिंह 👇🏻https://aryaveerdal.in/kranti-veer-udhamsingh/

इस चोटी के बदले लूँ ना, दुनियाँ की जागीर में ।

बाँध नहीं सकते मुझको, तुम जर की जंजीर में ।।

हकीर ना मैं ऐसा चाहूँ चोटी देकर रोटी को।।३।।

शीश काट सकते हो लो, काट श्रीमान् मेरा ।

हटा नहीं सकते कभी, धर्म से तुम ध्यान मेरा ।

बलिदान मेरा पहुँचाए ‘वीरेन्द्र’ उच्चकोटि को ।।४।।

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