क्रान्तिवीर पं. रामप्रसाद

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गोरखपुर की जेल में बैठा माँ को लिखता परवाना।

देश धर्म का दीवाना ।।

जन्मदात्री जननी मेरी, ले अन्तिम प्रणाम मेरा ।

जन्म जन्म तक ना भूलूँगा, माताजी अहसान तेरा।

सेवा ना कर सका आपकी, यहीं मेरा है पछताना।।१।।

मेरी मौत का मेरी माँ से, जब सन्देश सुनाए ।

मेरी याद में तेरी आँख से आँसू ना बह जाए।।

वतन पे मरने वालों की माँ को, ना चाहिए घबराना ।।२।।

शहीद भगतसिंह 👉🏻https://aryaveerdal.in/shahid-bhagat-singh/

सब माताओं की माता है, मेरी भारत माता ।

उसकी आज़ादी की भेंट में चढ़ने को मैं जाता।।

जिसको प्यार नहीं माता से, उसका अच्छा मर जाना।।३।।

होगा वतन आजाद एक दिन ऐसा भी आएगा।

स्वर्ण अक्षरों में माँ तेरा नाम लिखा जाएगा।

खेमसिंह भी गाएगा, बना-बना तेरा गाना । । ४ । ।

क्रान्ति वीर उधमसिंह 👉🏻https://aryaveerdal.in/kranti-veer-udhamsingh/

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