1 ध्येय गीत (प्रातः यज्ञ के समय )

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ओ३म् इन्द्रं वर्धन्तो अप्तुरः कृण्वन्तो विश्वमार्यम् । अपघ्नन्तो अराव्णः ।।

गीत : – बेला अमृत गया आलसी सो रहा 👇https://aryaveerdal.in/bela-amrit-gaya-aalsi-so-raha/

सा रे गा मा पाधा सा रे सा रे गा रे सा । . निसा रे सा निधा पा पाधा मा पा धामा पा गा रे सा रे सा

गीत : – उठ जाग मुसाफिर भोर भई 👇https://aryaveerdal.in/uth-jaag-musafir-bhor-bhai-ab-rain-kahan-jo-sovat-hai/

हे प्रभो ! हम तुम से वर पाएं ।

सकल विश्व को आर्य बनाएँ । ।

फैले सुख सम्पत्ति फैलाएँ ।

आप बढ़ें तव राज्य बढ़ाएँ । । १ । । हे प्रभो !

राग द्वेष को दूर भगाएँ ।

प्रीति रीति की नीति चलाएँ । । २ । । हे प्रभो!

गीत : – प्रातः कालीन गीत 👇 https://aryaveerdal.in/jaag-gaye-ab-sona-kya-re/

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