यह गगन हमारा है

0
36
यह गगन हमारा है यह धरती अपनी है।

इसकी हर सन्ध्या भोर सुहानी अपनी है।

सूरज की किरणें देख रही, धरती के बेटे बदल रहे ।

नदियों की धड़कन तेज हुई, सागर के सीने उबल रहे।।

आज़ाद इरादों को, बन्धन स्वीकार नहीं।

दुश्मन की गर्दन पर तलवार उतरनी है ।।१।।

भारत के तुम वीर सिपाही 👇https://aryaveerdal.in/bharat-ke-tum-veer-sipahi/

जीने दो और जीओ स्वयं भी, भारत भू की वाणी है।

लेकिन हमको अन्यायी, सत्ता की धूल उड़ानी है ।।

हमको तो जीवन की, दुर्बलता स्वीकार नहीं ।

अपने पुरखों की तरह, फिर अमरता वरनी है।।२।।

आओ अटल प्रतिज्ञा ले ,दुश्मन का दर्प मिटाने को ।

आज़ादी पर ही जीने को आजादी पर मिट जाने को ।।

विप्लव की आँधी रुके, हमको स्वीकार नहीं।

हमको तो रावण की, फिर लंका जलानी है || ३ ||

यह धरती हिन्दुस्तान की 👇 https://aryaveerdal.in/yah-dharti-hindustan-ki/

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here