प्रांतीय शिविर दिल्ली 2006

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आर्य वीर दल दिल्ली प्रदेश के तत्वावधान में ‘विशाल आर्य वीर चरित्र निर्माण शिविर 2006’ 26 मई से 4 जून 2006 तक कुलाची हंसराज माडल स्कूल, फेज-।।। में आयोजित किया गया। जिसमें लगभग 250 आर्यवीरों ने सार्वदेशिक आर्य वीर दल द्वारा नियत आर्य वीर श्रेणी एवं शाखानायक श्रेणी पाठ्यक्रमों में प्रशिक्षण प्राप्त किया।

शिविर में अनेक वैदिक विद्वानों, एवं सुयोग्य व्यायाम शिक्षकों ने 10 दिनों तक आर्यवीरों को पूरी लगन के साथ बौद्धिक व शारीरिक शिक्षण दिया। शिविर के मध्य 28 मई 2006 को सभी शिविरार्थियों का सामूहिक यज्ञोपवीत संस्कार कराया गया। 2 जून 2006 को अशोक विहार क्षेत्र में एक विशाल शोभायात्रा निकाली गई, जिसमें आर्यवीरों ने भव्य व्यायाम प्रदर्शन कर आम जनता का मन मोह लिया। आर्यवीरों का अनुशासन देखने लायक था। मार्ग में आर्य समाज अशोक विहार फेज-।। के अधिकारियों ने आर्यवीरों का जोरदार स्वागत किया। दीप सिनेमा से होते हुए शोभायात्रा आर्य समाज अशोक विहार फेज-। पहुँची। जहाँ पर शोभायात्रा जनसभा में परिवर्तित हो गई।

4 जून 2006 को शिविर का समापन व दीक्षांत समारोह आयोजित किया गया। समापन समारोह में महाशय धर्मपाल, श्री रमाकांत गोस्वामी, श्री रामजीलाल आर्य, श्री रामनाथ सहगल, ब्र० राजसिंह आर्य, श्री अविनाश कपूर आदि अनेक आर्यनेताओं ने उपस्थित होकर आर्य वीरों को अपना आर्शीवाद दिया। समारोह में आर्यवीरों ने शिविर में सीखी गई विभिन्न विधाओं का प्रदर्शन किया। समारोह के अंतिम भाग में विशेष कमाण्डो प्रदर्शन ने उपस्थित जनसमूह को रोमांचित कर दिया। वर्ष 2006 हेतु आर्यवीर दल दिल्ली प्रदेश का सर्वोच्च सम्मान “आर्यवीर

रत्न” श्री दिनेश आर्य (नजफगढ़) को उनके अद्वितीय योगदान के लिए प्रदान किया गया।

शिविर के सफल आयोजन में सर्वश्री बृजेश आर्य, संजीव आर्य, दिनेश आर्य, रामनारायण आर्य, अनिल आर्य, सुरेश आर्य (सभी शिक्षक), गौतम आर्य, आदित्य आर्य, अविचल आर्य व गजराज आर्य (सभी कार्यकर्ता) ने विशेष योगदान देकर शिविर को सफल बनाया। श्री पंकज आर्य एवं श्री कमल आर्य को उनके अद्वितीय योगदान के लिए विशिष्ट कार्य सम्मान हेतु चुना गया। शिविर हेतु आर्यसमाज अशोक विहार फेस-1 एवं फेस- || के अधिकारियों का विशेष आर्शीवाद दल को प्राप्त हुआ।

इसके अतिरिक्त सर्वश्री जगबीर आर्य, बृहस्पति आर्य, वीरेश आर्य जी ने पूरे समय शिविर में रहकर शिविर के आयोजन का सफल बनाया। अंत में श्री वीरेन्द्र आर्य जी ने सभी का हार्दिक धन्यवाद किया।

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