आर्य वीर दल प्रशिक्षण शिविर का शुभारम्भ संभल

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आर्य वीर दल प्रशिक्षण शिविर का शुभारम्भ

युवकों को संस्कारवान बनाना हमारा मुख्य उद्देश्य- क्षेत्रपाल सिंह आर्य

गवां – कस्बा गवां के आर्य समाज मंदिर में आर्य वीर प्रशिक्षण शिविर का शुभारंभ ध्वजारोहण के साथ किया गया

ध्वजारोहण समाज के संरक्षक क्षेत्रपाल सिंह आर्य द्वारा किया गया शिविर के शुभारंभ पर क्षेत्रपाल सिंह आर्य ने आर्य वीरों को सम्बोधित करते हुए कहा कि आर्य समाज की युवा शक्ति आर्य वीर दल है। आर्य वीर दल कलियुग में सतयुग का सपना है। आर्य वीर दल उत्तर प्रदेश के सहसंचालक दयाशंकर आर्य ने कहा कि हमारा भारत देश कभी विश्व गुरु और दुनिया का सर्वाधिक शक्तिशाली, समृद्धिशाली, चक्रवर्ती, आध्यात्मिक राष्ट्र था परंतु आज वेद विरुद्ध आचरण व पाश्चात्य जीवन शैली अपनाने के कारण पतनावस्था में पहुंच चुका है फलस्वरुप पूरे समाज में अनैतिकता, अकर्मण्यता, नशाखोरी, व्यभिचार, भ्रष्टाचार, भाषावाद, प्रांतवाद, जातिवाद, आतंकवाद सर्वत्र व्याप्त हो चुका है । आज दिग्भ्रमित समाज को आर्य समाज के सुनहरे सिद्धांत ही सन्मार्ग पर ला रहे हैं । इन सभी समस्याओं के निवारणार्थ आर्य वीर दल के शिविर एवं आर्य समाज की वैदिक सत्संग समारोह आयोजित किए जा रहे हैं । आर्य वीर दल के जिला संचालक ज्योति वसु आर्य ने बताया कि आर्य वीर दल के उद्देश्य संस्कृति रक्षा,शक्ति संचय,सेवा कार्य है। वेद का ज्ञान सृष्टि के आरम्भ में समस्त प्राणियों के कल्याण हेतु ईश्वर ने मनुष्यों को दिया। इसीलिये हमारी संस्कृति वेदों पर आधारित है। यह वैदिक संस्कृति विश्व में सबसे प्राचीन है। इसी संस्कृति का अनुसरण करते हुये विभिन्न ऋषि-मुनियों, मर्यादापुरुषोत्तम श्रीराम, योगीराज श्रीकृष्ण, ब्रह्मचारी हनुमान, नीतिज्ञ चाणक्य, गुरु गोविन्द सिंह, महाराणा प्रताप, छत्रपति शिवाजी, महर्षि दयानन्द सरस्वती आदि अनेक महापुरुषों ने जीवन की उत्कृष्टता को प्राप्त किया।

ऐसी महान् संस्कृति का अनुसरण एवं संवर्द्धन करना इस दल का प्रथम उद्देश्य है। जिला आर्य प्रतिनिधि सभा के महामंत्री रामवीर सिंह शास्त्री ने कहा कि
शक्ति से अभिप्राय शारीरिक उन्नति करना है। शारीरिक उन्नति के लिये आहार, निद्रा, ब्रह्मचर्य, स्वाध्याय के स्तम्भों को सुदृढ़ बनाये रखना आवश्यक है।

शारीरिक, आत्मिक एवं चारित्रिक रूप से बलवान् मनुष्य रत्न के समान चमकता हुआ चहुँ ओर अपनी अलग प्रतिष्ठा, सम्मान व पहचान बनाता है।

पुरुषार्थी बनकर अपने शरीर एवं आत्मा को कर्म की भट्टी में जलाकर शारीरिक एवं आत्मिक उन्नति को प्राप्त करना तथा उपलब्ध साधनों द्वारा आत्मरक्षा का प्रशिक्षण प्राप्त कर अपनी व दूसरों की आपत्काल में सुरक्षा करना, इस दल का दूसरा उद्देश्य है। शामली से पधारे आर्य वीर दल उत्तर प्रदेश पश्चिम के प्रधान व्यायाम शिक्षक राज कुमार आर्य ने कहा कि
सेवा मानव को मानव से जोड़ने वाली महत्वपूर्ण कड़ी है। सेवा करना तप समान है। सेवा करने वाले के हृदय में प्रेम, करुणा, उदारता, परोपकार और सहनशीलता का होना आवश्यक है। कार्यक्रम का संचालन यशपाल शास्त्री ने किया कार्यक्रम में नरेंद्र कुमार आर्य, अखिलेश अग्रवाल, अजय पाल सिंह, शरद कुमार, कृष्ण कुमार आर्य, अशोक कुमार आर्य, गोविंद आर्य, नवनीत भटनागर, आनंद स्वरूप अग्रवाल, अजीत भटनागर, वेद प्रकाश गुप्ता, रामसेवक, जितेंद्र कुमार शर्मा, विपिन कुमार आर्य, हर्षित शर्मा, चंद्रपाल आर्य, देवव्रत आर्य, रजनीश कुमार, वैभव कुमार, दीपक कुमार, रामवीर सिंह शास्त्री, तिलक सिंह आर्य, डॉ ओमपाल आर्य, प्रदीप कुमार आर्य, तिलक सिंह आर्य एवं क्षेत्रीय आर्य समाजों के पदाधिकारी तथा कार्यकर्ता मौजूद रहे ।

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