ओ म्हारा मेवाड़ी सरदार

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ओ नीला घोड़ारा असवार, ओ म्हारा मेवाड़ी सरदार |

ओ म्हारी सुनता ही जा जो जी। राणा जी म्हारी ।।

ए राणा थारी दकाल सुनके अकबर धूज्यो जाए।

हल्दी घाटी रंगी खूणस्यूँ नालो बेतो जाए । ।

चाली मेवाड़ी तलवार, बेग्या खूणारा खेंगाल।ओ म्हारी ||१||

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झालो गयो सुरगा माही पातल लोह लवाय ।

चेतक तनस्यूँ बहे कि नालो करतब बरणो न जाए । ।

म्हानें जीवासूँ नहीं प्यार म्हानें मरनौ है इक बार ओ म्हारी ।।२।।

ए शक्तिसिंह की गर्दन झुकगी पडूयो पगाँ में आए।

गले झूमग्यो प्यार लूमग्यो वचन न मोंहड़े आए। ।

दोन्यूँ आसूँड़ा ढलकाए वारी बाहाँ कुण छुड़वाए। ओ म्हारी ।।३।।

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