आर्य वीर दल प्रथम श्रेणी शारीरिक पाठ्यक्रम

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  • शारीरिक पाठ्यक्रम प्रथम श्रेणी ( आर्यवीर )

 

पूर्णांक ८५०

सर्वांगसुन्दर व्यायाम

१ भुजबल विकासक ,
२ वक्ष विकासक ,
३ स्कन्ध शक्ति विकासक ,
४ मिश्र हस्त ,
५ कटिनमन
६ कटि विकर्षण ,
७ कटिनमन -२ ,
८ गरुडोड्डीन ,
९ शिरोहस्तनति ,
१० कूर्दन ताल
११ हस्तपाद शक्ति विकासक ,
१२ स्कन्ध शक्ति विकासक , २
१३ कुक्षी शक्ति विकासक १
१४ कुक्षी शक्ति विकासक २
१५ जानू शक्ति विकासक
१६ नती बैठक

 दण्ड बैठक

दण्ड सज्ज , स्थिति , उपविश , विश्रमः , तिष्ठ , प्रारभस्व , हाथों में छाती जितना अन्तर लेकर बैठना ।

१- साधारण दण्ड ,
२- पार्श्व दण्ड ,
३- वृश्चिक दण्ड ,
४- हनुमान् दण्ड ,
५- राममूर्ति दण्ड ,
६- सिंह दण्ड ,
७- पलट दण्ड ,
८- सर्प दण्ड ।

बैठक-

नाप लो , दोनों पैरों का अन्तर ६-८ इञ्च , दोनों पैर समानान्तर रहेंगे ।

१- साधारण बैठक ,
२- सपाट बैठक ,
३- पहलवानी बैठक ,
४- राममूर्ति बैठक ,
५- पवित्रा बैठक ,
६- लेहरा बैठक ,
७- हनुमान् बैठक –१
८- हनुमान बैठक – २

विशेष आर्य वीरांगनाओं के लिए दण्ड – बैठक का अभ्यास वर्जित है । उन्हें सूर्य नमस्कार और भूमि नमस्कार करना चाहिये ।

 

 नियुद्धम् प्रथम श्रेणी पीत पद भाग – १

हस्त प्रहार १-

१ त्रिदेश मुष्टि – प्रहार ( थ्री स्टायल पञ्च )
२ त्रिदेश युगपत् मुष्टि – प्रहार ( डबल पञ्च )
३ त्रिगुण मुष्टि – प्रहार ( ट्रिपल अटैक )
४ अर्द्ध मुष्टि – प्रहार ( हाफ पञ्च दोनों हाथों से )
५ अर्द्ध मुष्टि – प्रहार ( एक हाथ से )
६ संयुक्त मुष्टि – प्रहार ( डबल बैलेन्स पञ्च दोनों ओर )
७ विलोम पार्श्व मुष्टि – प्रहार ( रिवर्स साइड पञ्च )
८ षड्विध मुष्टि – प्रहार ( सिक्स स्टायल पञ्च )
९ व्याघ्रपद – प्रहार ( टाइगर क्लेप पञ्च )
१० व्याघ्रनख -प्रहार ( टाइगर पिन पञ्च )
११ सर्पमुख – प्रहार ( स्नेक पञ्च )
१२ श्येन – प्रहार ( ईगल पञ्च )
१३ युगपत् हस्ततल – प्रहार ( डबल रिवर्स क्लैप पञ्च )
१४ अंगुलि भल्ल – प्रहार ( फिंगर चाप )
१५ त्रिपद मुष्टि – प्रहार ( थ्री स्टैपिंग फ्रण्ट बैक पञ्च )

 

पदाघात ( किक )

१ पुरः पदाघात ( फ्रण्ट किक )
अधः , मध्य एवं ऊर्वभाग में पादाग्र ( पञ्जे ) से प्रहार करना एवं सुरक्षा

२ पार्श्व पदाघात ( साइड किक )
( क ) कीबेदाची ( अश्वारोही ) स्थिति में दाहिने बायें प्रहार करना .
( ख ) एक कदम दाहिने या बायें ( आगे पीछे से ) लेकर पदाघात
( ग ) दो कदम आगे लेकर पुनः पार्श्व पदाघात

३- पृष्ठे पदाघात ( बैक किक , एड़ी से पेट या मुख पर मारना )

 

 

सुरक्षा ( ब्लाक )  

१- ऊर्ध्वदेश सुरक्षा ( अपर ब्लाक )
२- मध्यदेश सुरक्षा ( मिडिल ब्लाक )
( क ) बाह्यपसारणम् ( आउट साइड ब्लाक )
( ख ) आभ्यन्तरापसारणम् ( इन साईड ब्लाक )
३- अधोदेश सुरक्षा ( लोअर ब्लाक )
४- उपर्युक्त प्रहारों तथा पदाघातों को रोकने का अभ्यास ।
५- आत्मरक्षा एक हाथ पकड़ने पर छुड़ाना और प्रत्याक्रमण

 

आसन प्राणायाम क्रिया

आसन-
१ शीर्षासन ,
२- शवासन ,
३- उत्तानपादासन ,
४- सर्वांगासन ,
५ मत्स्यासन ,
६- हलासन ,
७- मकरासन ,
८ भुजंगासन ,
९- शलभासन ,
१० धनुरासन ,
११- दण्डासन ,
१२- पश्चिमतानासन ,
१३ वक्रासन ,
१४ अर्धमत्स्येन्द्रासन ,
१५ वज्रासन ,
१६- सुप्तवज्रासन ,
१७- मयूरासन ,
१८ चक्रासन ,
१६ – ताड़ासन ,
२०- योगमुद्रा ।

बन्ध  -. 

मूलबन्ध , उड्डीयान बन्ध , जालन्धर बन्धों का अभ्यास ।

प्राणायाम –

१- नाड़ीशुद्धि के ४ भेद , २ बाह्य प्राणायाम , ३- सूर्यभेदी ।

क्रिया – कपालभाति , जलनेति , सूत्रनेति का क्रियात्मक अभ्यास

सैनिक शिक्ष

१- सामने बायें , दाहिने हाथ के संकेत से पंक्ति बनवाना , दल , सज्ज , दक्षिणतो – मिल , सम्मुखः , एक पंक्तिः , क्रमशः संख्या , द्वयोः संख्या , त्रिषु संख्या ।

२ दो , तीन , चार पंक्ति बनवाना , पंक्ति द्वयम् , पंक्ति त्रयम् , पंक्ति चतुष्टयम् ।

३ वामतः , दक्षिणतः , पृष्ठे , पुरो – यास्यति । वामं , दक्षिणं पृष्ठे – भ्रम ।

४ एकपात् , द्विपात् , त्रिपात् , चतुष्पात् – वामं , दक्षिणं , पृष्ठे , अग्रे चल ।

५ वामार्द्धं , दक्षिणार्द्ध – भ्रम ।

६ संचलनम् ( मार्चिंग ) ।

त्रिषु वामतः क्षिप्रं चल , शनैश्चल , धावन् चल या धाव । चलते हुए – लम्बपादः , लघुपाद :, पादपरिवर्तनम् , दक्षिणचक्रम् , वामचक्रम् , वामं भ्रम , दक्षिणं भ्रम , पृष्ठे भ्रम , पादतालः , अग्रेसर , तिष्ठ ।

 

 

७- ध्वजारोहण , ध्वजावतरण का अभ्यास ।
वर्गनायक स्वस्थानम् , शेष आर्यवीर अनुसरत , उपवर्गनायक संख्या , गायक , वादक , ध्वजस्थानम् , ध्वजगानं , प्रारभस्व , नमस्ते , विकिर । आज्ञा देते समय दल नाम से सम्बोधित किया जाएगा ।

८- सभाओं में बैठने तथा अधिकारियों से वार्तालाप करने का ढंग ।

दण्ड ( लाठी )

आज्ञा- भुजदण्डः , दण्डसज्ज , दण्डविश्रमः , प्रारभस्व , तिष्ठ ।

१ प्रहार ( मार हाथ ) , मार चाल ।
२ सुरक्षा ( रोक हाथ ) , रोक चाल ।
३ दो दिक् प्रहार ( आगे दो मार , पीछे दो रोक )
४ रणमार बायीं ओर से पीछे आगे मारना ।
५- रणमार दाहिनी ओर से आगे पैर बढ़ाकर आगे मारना , पीछे पैर लेते हुए बायीं ओर से मारना ।
६- रणमार चाल – दाहिनी ओर से आगे बढ़ना , पीछे आना ।
७- रणमार उड्डीन – आगे पीछे ।
८. रणमार बैठी ।

इसी भाँति कुक्षी मार का अभ्यास करना ।

द्वन्द्व –

१ शिर पर मारना , रोकना ।
२- शिर , कान , कमर , गट्टा मार , रोक ।
३ बायीं कनपटी , दाहिनी कनपटी , हूल , शिरमार , रोक ।

शूल

आज्ञायें – स्कन्धशूलम् , अधःशूलम् , भूमिशूलम् , सज्जितशूलम ।

१ शूल सञ्चालन के ५ व्यायाम

दो दिक्च्छेद – १ पीछे कुन्दा ( बट ) आगे अणी मारना । ३ दो दिक्च्छेद – २ पदग्राह ( घसर ) के साथ कुन्दा अणी मारना , दोनों दिशाओं

४ आगे अणी और कुन्दा मारना , दोनों दिशाओं में अभ्यास ५ आगे अणी ( घोप निकाल ) करते हुए आगे बढ़ना ।

क्षुरिका

१- कूर्पर वन्ध १ , २ व ३

२- मणिबन्ध मोटन ( कलाई मरोड़ ) – १ व २

३ कूपर भग्न १ व २

४- पादप्रहार १- बायें हाथ पर वार रोक कर उसे मरोड़ते हुये पीछे जाना , दाहिनी किक पेट में मारना ।

५- पादप्रहार- २ – नीचे बायीं ओर भूमि पर हाथ टिकाकर दाहिनी किक तथा सामने झुकना और कोहनी मारना

६- पादप्रहार- ३ – ( पार्श्वभाग से ) सामने ऊपर से आये प्रहार को बायें दाहिने झुककर खाली करना तथा अपने दाहिने या बायें पैर से प्रहार करना ।

क्रीड़ाएँ –

१- नेता की तलाश , गोल खो , लंगड़ी , मेंढक – मच्छर , शेर – बकरी , साँप – नेवला , रुमाल झपट , कुक्कुट – युद्ध , स्कन्ध युद्ध , डण्डा दौड़ तथा अन्य देशीय क्रीड़ाओं का अभ्यास |

अनुशासन –

१ शिविर काल में प्रत्येक आर्यवीर को शिविर के नियमों का पालन करना अनिवार्य है ।

२- समुचित गणवेश , सफाई व्यवस्था , कर्त्तव्यपालन एवं उपस्थिति का प्रतिदिन निरीक्षण किया जाएगा ।

३- परस्पर वार्तालाप , अधिकारियों से शिष्ट व्यवहार , विनम्रता की सभी आर्यवीरों से अपेक्षा की जाती है ।

 

 

बौद्धिक लिखित

 

१ – ६ विषय तथा अन्य प्रवचन

मौखिक –

सैद्धान्तिक , सामान्य ज्ञान एवं प्रेरक जीवन से जीवन चरित्रों का परिचय बौद्धिक शिक्षक सायंकाल प्रेरक जीवन के प्रसंग सुनाये और प्रश्न पूछे । ★ ★ ★

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