आर्य वीर दल शाखाओं के लिये कुछ साधारण नियम

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  1. शाखा प्रतिदिन नियत समय पर लगाना अनिवार्य है। विशेष अवस्था में नगर नायक अथवा शाखा नायक इसमें परिवर्तन भी कर सकता है। परन्तु शाखा नायक को इसकी सूचना अपने नगर नायक को अवश्य देनी होगी।
  2. सैनिकों की सुविधानुसार प्रातः या सन्ध्या समय कमसे कम एक घण्टे प्रतिदिन कार्य होगा।
  3. शाखा में नित्य ईश प्रार्थना, व्यायाम, आत्म रक्षा तथा बौद्धिक शिक्षण और ध्वजगान होना अनिवार्य है। सैनिक शिक्षा तथा खेल सप्ताह में कम से कम दो दिन अवश्य होने चाहिये। खेल यदि समय आज्ञा दे तों नित्य भी करायें जा सकते हैं।
  4. कार्य स्थल पर पूर्ण सैनिक अनुशासन रखा जाना चाहिए।
  5. शाखा के संवर्द्धन तथा परिवर्तन का उत्तरदायित्व शाखा नायक पर, शारीरिक शिक्षण का उत्तरदायित्व शिक्षा नायक पर, बौद्धिक प्रशिक्षण बौद्धिक नायक पर तथा सैनिकों को कार्य स्थल पर ठीक समय पर उपस्थित करने और उनकी प्रत्येक गतिविधि पर ध्यान रखने का उत्तरदायित्व वर्ग नायकों पर होगा।
  6. नगर की समस्त शाखाओं का छोटे नगरों में सप्ताह में एक बार तथा बड़े नगरों में मास में एक बार सामूहिक कार्य अवश्य होगा।
  7. नगर की समस्त शाखाएँ तीन मास में एक बार भ्रमण के लिए नगर के बाहर अवश्य जाएँगी।

8.शाखा में ध्वज का फहराना अनिवार्य है।

  1. शाखा नायक को अपनी शाखा की रिपोर्ट अपने नगर नायक को अवश्य देनी होगी।
  2. सप्ताह में एक दिन बौद्धिक शिक्षण व्याख्यान, निबन्ध कविता तथा गाने आदि कराये जाने चाहिये।
  3. शाखा के सैनिकों से उनकी आयु के अनुसार व्यायाम तथा अन्य कार्य कराने चाहिये।

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