हम रुकना झुकना क्या जाने।
हम बढ़ते हैं सीना ताने ।।
हम सैनिक वीर शहीदों के।
पर हित में जिनके शीश कटे ।
हम दयानन्द के दीवाने ।।१।।
हम हँस-हँस कर दुख झेलेंगे।
सर्वस्व धर्म पर दे देंगे।
हम लेखराम से मस्ताने।।२।।
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हम कर्म वचन के सच्चे हैं।
हम धुन अपनी के पक्के हैं।
हम वेद ज्योति के परवाने ।।३।।
दुःख आता है तो आने दो।
सुख जाता है तो जाने दो।
हम वीर हैं डरना क्या जाने ।।४।।
हम वैदिक नाद बजाएँगे।
सुख शान्ति जगत् में लाएँगे।
सारी दुनियाँ हमको माने । । ५ । ।
देश जगाना है 👉🏻 https://aryaveerdal.in/desh-jagana-hai/

