
आप आर्यजगत के मूर्धन्य विद्वान, भारतीय व्यायामों के पारंगत प्रशिक्षक तथा
योग के क्षेत्र में ख्याति प्राप्त हैं।आपका जन्म दिनांक 1 3 फरवरी,सन् 1943 ई. को
राव उमराव जी के घर में हुआ |आपने पंजाब विश्वविद्यालय से मैट्रिक,महर्षि दयानन्द
विश्वविद्यालय रोहतक से व्याकरणाचार्य व दर्शनाचार्य तथा लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय
संस्कृत संस्थान दिल्ली से “धनुर्वेद’ पर पी.एच.डी.की।
सांसारिकचाकचक्य से दूर, साधारण व्यक्तित्व दिखाई देने पर भी आप एक
साधना सम्पन्न व्यक्तित्व के स्वामी हैं। आपने भारतीय शस्त्रविद्या के आकर-ग्रन्थ
‘धनुर्वेद” पर उच्चस्तरीय शोधकार्य किया है। आपने देश के विभिन्न प्रान्तों के सुदूर
अंचल तक फैली विभिन्न प्रकार की शस्त्रविद्याओं एवं पारम्परिक व्यायामों को सीखने,
समझने एवं उन्हें विकसित कर नौजवान पीढ़ी तक पहुंचाने का अभूतपूर्व कार्य किया है।
भारतीय शस्त्र विद्या के आप प्रमाण भूत आचार्य हैं ।
सार्वदेशिक आर्य वीर दल के आप
सन् 1988-90 तक उप-प्रधान संचालकतथा सन् 1991 ई.से अक्तूबर 2018
ई. तक प्रधान संचालक/प्रधान सेनापति रहे । सार्वदेशिक आर्य वीर दल के माध्यम से
पिछले 30 वर्षों से महर्षि दयानन्द सरस्वती के युवा निर्माण आह्वान को दृष्टिगत कर
युवा पीढ़ी को संस्कारित एवं प्रशिक्षित करने का अभियान चला रहे हैं। अपनी प्रतिभा,
विद्या एवं कला को कभी भी आपने धनार्जन का साधन नहीं बनाया ।सामाजिक पाखण्ड
के आप मुखर विरोधी हैं।
योग, स्वाध्याय और अध्यवसाय आपके जीवन की एकमात्र पूंजी है। आप
उच्चकोटि के योग साधक हैं।
आपके लिखे ग्रन्थ व पुस्तकें :-‘यज्ञ का आध्यात्मिक स्वरूप’, योगशिक्षा,
योगासन,सन्तुलित भोजन,व्याख्यान शतक,वेद स्वाध्याय,धनुर्वेद,प्रेरक जीवन आदि।
निवास स्थान : आप भारत के विभिन्न नगर-ग्रामों में वेद प्रचार हेतु घूमते
रहते हैं। गुरुकुल गौतम नगर, नई दिल्ली (अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान के पास)
में तथा वर्तमान निवास आर्ष योग संस्थान सैक्टर 76, फरीदाबाद में आप रहते हैं।
