हरियाणा/फरीदाबाद क्षेत्र में आर्य वीर दल

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सार्वदेशिक आर्य वीर दल की स्थापना 26 जनवरी सन् 1 929 ई.को दिल्ली
में हुई। संस्कृति रक्षा,शक्ति संचय तथा सेवा-इसके तीन उद्देश्य हैं। श्री शिवचन्द्र जी,
श्री ओमप्रकाश त्यागी जी,श्री बाल दिवाकर हंसजी तथा स्वामी डॉक्टर देवव्रत आचार्य
जी-26.10.2018 तक,इसके क्रमशःप्रधान संचालक रहे। आर्य वीर दल गाँव व
नगरों में शाखाओं के माध्यम से बच्चों व नौजवानों के चरित्र निर्माण का कार्य करता है।

हरियाणा में सन् 1980 में आर्य वीर दल का पुनर्गठन किया गया। श्री उत्तम
चन्द शरर जी को संचालक, श्री वेद प्रकाश आर्य (रोहतक) को मन्त्री बनाया गया।
फरीदाबाद में लाला लछमण दास (5 भाईसाबुन वाले), श्री सतपाल आर्य (पलवल) ने
दल के प्रचार-प्रसार में सराहनीय श्रम किया | चावला कालोनी बल्लबगढ़ के श्री वेद
प्रकाश (छाबड़ा) आर्य जी सन् 1975 ई.से मण्डलपति थे।पुनर्गठन के बाद श्री ईश्वर
सिंह जी (मिर्जापुर-बल्लबगढ़) सन् 1980 में मण्डलपति तथा श्री देशबन्धु आर्य जी
(5 भाई साबुन वाले) मन्त्री बने। पिछले 20 से भी ज्यादा वर्षों से श्री उमेद शर्मा जी
आर्य वीर दल हरयाणा के संचालक हैं।

श्री दुलीचन्द जी जैलदार की प्रेरणा से गाँव के कई युवक गुरुकुल गदपुरी में
शिक्षा प्राप्त करने गए । उनमें से केवल श्री हरदेव जी ही, शास्त्री की उपाधि प्राप्त कर
पाए। आप फतेहपुर बिल्लौच के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में संस्कृत पढ़ाते
थे। कक्षा में विद्यार्थियों में आर्यसमाज के संस्कार देते थे। सन् 1969 ई.में जैलदार
जी की मृत्यु के पश्चात आर्य समाज के प्रचार मे शिथिलता आ गई।

फतेहपुर बिल्लौच के हाई स्कूल में ग्राम डीग के होतीलाल जी भी, श्री हरदेव
शास्त्री जी के शिष्य रहे। उन्होंने शास्त्री जी से आर्यसमाज के संस्कार प्राप्त किए । सन्
1979 ई. में होतीलाल जी ने I.T.I. पास की तथा फरीदाबाद की किसी कम्पनी में
स्टेनो लगे।कम्पनी का मालिक आर्यसमाजी था ।आर्यसमाज चावला कालोनी बल्लबगढ़
के उत्सव में आपकी मुलाकात आर्य वीर दल फरीदाबाद के मण्डलपति श्री वेद प्रकाश
आर्य जी से हुई तथा गाँवों में आर्य वीर दल की शाखा लगवानी शुरु की। श्री वेद प्रकाश
आर्य जी की बल्लबगढ़ में कपड़ों की दुकान थी। इसी दुकान पर हरवीर आर्य (स्वर्गीय)
की मुलाकात आपसे हुई तथा श्री वेद प्रकाश आर्य जी के सहयोग से गाँव सुनपेड़ में
आर्य वीर दल की शाखा लगनी प्रारम्भ हुई।

ग्राम सुनपेड़ में, शाहपुर मोड़ पर स्थित पौराणिक मन्दिर के पास आर्य वीर
दल की शाखा सन् 1979 ई. में लगनी प्रारम्भ हुई। हरवीर आर्य (स्वर्गीय) सुपुत्र श्री
रूपसिंह (आर्य वीर दल सुनपेड़ के संरक्षक बने) हरवीर सुपुत्र श्री बाबूराम व नरजीत
सुपुत्र महाशय सतपाल जी शिक्षक बने तथा हरदेवशास्त्री बौद्धिकाध्यक्ष बने । गाँव में
दैनिक शाखा, साप्ताहिक यज्ञ तथा प्रभात फेरी शुरु की गई।

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