योग-व्यायाम प्रशिक्षण, व्यक्तित्व विकासएवं चरित्र निर्माण शिविर जोधपुर

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योग-व्यायाम प्रशिक्षण, व्यक्तित्व विकास एवं चरित्र निर्माण शिविर जोधपुर

आर्यसमाज की युवा इकाई आर्यवीर दल जोधपुर

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शीतकालीन आवासीय

योग-व्यायाम प्रशिक्षण, व्यक्तित्व विकास एवं चरित्र निर्माण शिविर

24 दिसम्बर से 31 दिसम्बर 2023

शिविर स्थलः महर्षि दयानन्द सरस्वती स्मृति भवन न्यास

जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय, ओल्ड केम्पस मोहनपुरा पुलिया के पास, जोधपुर

आयोजक महर्षि दयानन्द सरस्वती स्मृति भवन न्यास (पजि.) जोधपुर

मान्यवर बन्धुओं

आपको यह जानकर प्रसन्नता होगी कि महर्षि दयानन्द

सरस्वती द्वारा स्थापित संघटन आर्यसमाज की युवा इकाई

आर्यवीर दल जोधपुर का शीतकालीन आर्य वीर दल

प्रशिक्षण एवं चरित्र निर्माण नशा मुक्ति

प्रदूषण मुक्त प्राकृतिक शुद्धचरणयुक्त

महर्षि दयानंद सरस्वती स्मृति भवन, जोधपुर में आयोजित किया जाता है

शिविर में

भाषण, मादक पदार्थों का सेवन, संस्कारहीनता, कुसंगतिआदि

बुराइयों बढ़ती जा रही हैं। ऐसे सांस्कृतिक प्रदूषण के समय में

सुयोग्य प्रशिक्षकों एवं वैदिक विद्वानों की देखरेख में लगने वाल

यह शिविर युवावर्ग के। लिए विशेष महत्वपूर्ण है

अनुरोध है कि आप अपने पुत्र एवं पुत्रियों को प्रेरित कर इस शिविर

में अवश्य भेजेंगे। जिससे वे शारीरिक, आध्यात्मिक मानसिक सामाजिक उन्नति कर सकें।

शिविर में युवा उन्नयन कार्यक्रम

आत्मरक्षा के लिये

जूड़ों-कराटे, लाठी काठी, भाला आदि शस्त्र संचालन संकटकालीन परिस्थिति में बचाव के तरीके

स्वास्थ्य रक्षा के लिये

योग, आसन, प्राणायाम, दण्ड बैठक सूर्य नमस्कार, सैनिक शिक्षा, मलखंब

आत्मिक उन्नयन के लिये सुयोग्य शिक्षकों एवं विद्वानों द्वारा संध्या, ध्यान, यज्ञ, संगीत एवं बौद्धिक प्रशिक्षण

यदि माता-पिता ( अभिभावक) चाहते हैं कि

आपके बच्चे आज्ञापालक हो, बड़ों का आदर करने वाले हो, संस्कारित व अनुशासित बने, शारीरिक, मानसिक व आत्यिक रूप से पूर्ण स्वस्थ मजबूत अपनी ईश्वर प्रदत्त योग्यताओं का पूर्ण रूपेण विकास करके सामाजिक उन्नति में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे सके

आप सभी अभिभावकों से पुरजोर अनुरोध है कि अधिकाधिक संख्या में अपने पुत्र-पुत्रियों, परिचितों एवं पारिवारिक सदस्यों के बच्चों को इस शिविर में भेजकर परिवार, समाज व राष्ट्र के नवनिर्माण में पुनीत कार्य में हमारा सहयोग करें।

आर्यसमाज के नियम

१- सब सत्यविद्या और जो पदार्थ विद्या से जाने जाते हैं उन सबका आदि मूल परमेश्वर है।

२- ईश्वर सच्चिदानन्दस्वरूप, निराकार, सर्वशक्तिमान्, न्यायकारी, दयालु, अजन्मा, अनन्त, निर्विकार, अनादि, अनुपम, सर्वाधार, सर्वेश्वर, सर्वव्यापक, सर्वान्तर्यामी, अजर, अमर, अभय, नित्य, पवित्र और सृष्टिकर्ता है, उसी की उपासना कर योग्य है।

३- वेद सब सत्यविद्याओं का पुस्तक है, वेद का पढ़ना-पढ़ाना और सुनना सुनाना सब आर्यों का परम धर्म है।

४सत्य के ग्रहण करने और असत्य को छोड़ने में सर्वदा उचत रहना चाहिये।

५- सब काम धर्मानुसार अर्थात् सत्य और असत्य को विचार करके करने चाहियें। ६-संसार का उपकार करना इस समाज का मुख्य उद्देश्य है अर्थात् शारीरिक, आत्मिक और सामाजिक उन्नति करना।

७- सबसे प्रीतिपूर्वक धर्मानुसार यथायोग्य वर्तना चाहिये।

८ – अविद्या का नाश और विद्या की वृद्धि करनी चाहिये।

९- प्रत्येक को अपनी ही उन्नति से सन्तुष्ट न रहना चाहिये किन्तु सबकी उन्नति में अपनी उन्नति समझनी चाहिये।

१०- सब मनुष्यों को सामाजिक सर्वहितकारी नियम पालने में परतन्त्र रहना चाहिये और प्रत्येक हितकारी नियम में सब स्वतन्त्र रहें।

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