क्रान्ति वीरों का पता

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तुम क्या पूछो, दें क्या बतला, हम किधर को जाने वाले हैं।

हम कातिल हैं, किसी जालिम के, और आग लगाने वाले हैं ।।

हम आप नहीं, माँ बाप नहीं, रहने को नगर घर ग्राम नहीं ।

खाने पीने मरने जीने का भी, कोई इन्तजाम नहीं । ।

जैसे मृग मुष्क को ढूँढता हो, यो पल भर भी आराम नहीं।

बस सिर के सौदागर समझो, और हमारा काम नहीं । ।

इस दुःखिया भारत माता का दुःख दर्द मिटाने वाले हैं ।। १ ।।

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जरा गौर से सुनकर देखों, तो यह आती है आवाज़ किधर ।

जिसको हम शीश झुकाते थे, वह गया भारत का ताज किधर ।

बाल पाल सान्याल गए, और नन्दकुमार महाराज किधर ।

अजीत कहाँ हरदयाल कहाँ, और खपा दिए पतलाज किधर ।

देश के इन दीवानों का, हम बदला चुकाने वाले हैं ।। २।।

बन्धे हाथ पैर मुख बन्ध हुआ, माता बन्धन में रहती है।

तन सूख हुआ इजर पिञ्जर, भारत माता दुःख सहती है ।।

बंगाल की घटना सुनकर के, आँखों से आँसू बहती है।

जलियाँ वाले को मत भूलो माँ बार बार यों कहती है ।।

इस प्यारी भारत माता को, सर भेंट चढ़ाने वाले हैं ||३||

आर्य समाज ने 👉🏻https://aryaveerdal.in/aary-samaj-ne/

बनकर दीवाने मस्ताने, हम फाँसी पर चढ़ जाएँगे।

इस जोर जुल्म की आँधी में, तान के सीना अड़ जाएँगे ।

हम देश के दीवानें परवाने, मौत से कुश्ती लड़ जाएँगे ।

जालिम की जुल्म कौसिल पर, बम बिजली बन पड़ जाएँगे ।

कहें ‘भीष्म’ हम क्रान्ति की इक, ज्योति जलाने वाले हैं ।।४।।

शहीदों की याद 👉🏻https://aryaveerdal.in/shahido-ki-yad/

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