प्यारे युवकों भूल न जाना, आर्य समाज महान को।
जीवनपथ पर आगे बढ़ना, रखना अपनी शान को ।।
देश धर्म जाति रक्षा का, तुम्हें हमेशा ध्यान रहे ।
भारत की प्राचीन संस्कृति का, तुमको अभिमान रहें ।।
रामकृष्ण के आदर्शों का पालन तुमको करना है।
शिवा प्रताप के राहों पर, निर्भीक तुम्हें हो बढ़ना है।।
एक बार फिर दुनियाँ गाए, भारत गौरव गान को । । १ । ।
ऋषियों की सन्तान हो तुम और गौतम कपिल कणाद तुम्हीं ।
अर्जुन कर्ण समान धनुर्धर, भीम बली हनुमान तुम्हीं ।
तलवार हो लक्ष्मीबाई की, नेताजी की हुँकार तुम्हीं ।
बिस्मिल रोशन लाहिड़ी, भगतसिंह आजाद तुम्हीं ।
दयानन्द के वीर सिपाही, रखना उसकी शान को ।।२।।
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दुनियाँ से अज्ञान मिटाना, यह कर्त्तव्य तुम्हारा है।
न होए अन्याय किसी पर, बीड़ा तुमें उठाना है।।
हो अभाव से दुःखित न कोई, सब को सुख पहुँचाना है।
छुआछूत और ऊँच-नीच का सारा भेद मिटाना है।।
शक्ति सेवा संस्कृति, संकल्प तुम्हारा आज हो ।।३।।
परमपिता का प्यारे युवकों, तुमको आशीर्वाद मिले।
मात-पिता गुरु वृद्धजनों का, सदा सर्वदा प्यार मिले।।
चरण चूमती रहे सफलता, जीवन में वरदान मिले।
सुन्दर स्वस्थ दीर्घ हो जीवन, सदा ही तुमको ज्ञान मिले।
यही कामना ‘त्रिभुवन’ की हैं, भारत माँ के लाल को ।।४।।
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