ब्रह्मतेज और क्षात्र धर्म में, जिसका कोई न सानी है।
आर्य वीर दल शक्ति यज्ञ है, संकल्पों का पानी हैं ।।
संस्कृति का ध्वजवाहक गायक, नायक है ऋत भावों का।
ऋषियों का तप त्याग मान मर्दन विषभरी हवाओं का ।। ,
सरस्वती के पावन तट की, सुरभित ऋचा सुहानी है । । १ । ।
बोलो जय जयकार 👇 https://aryaveerdal.in/bolo-jay-jay-kaar/
उच्च उदात्त आत्म गौरव, शिव संकल्पों का आँगन है।
कृण्वन्तो विश्वमार्यम् का, खुला हुआ विज्ञापन है।
भग्न हृदय को जोड़ रहा, नित यह अद्भुत विज्ञानी है ।।२।।
अन्यायी को न्याय सिखाता, दमन दण्ड उद्दण्डों को।
इसके होते अभयदान, मिलता न कहीं पाखण्डों को।
दुष्ट दलन के लिए भीम-सा, बल विक्रम लासानी है ।।३।।
स्वर्ग के समान अपना देश बनाएंगे 👇 https://aryaveerdal.in/swarg-saman-apna-desh-banayenge/
धधक रही ज्वाला में कूदे, वीर जुझारू ऐसा है।
यथा योग्य बर्ताव जानता, यह जैसे को तैसा है।।
दयानन्द के सुखद स्वप्न की जागी हुई जवानी है ।।४।।
मानवता का रक्षक बन, ले सेवा का अध्याय नया।
दीन दुःखी का प्रबल हितैषी, है इसका पर्याय दया ।।
सेवाव्रत का सुधा सिन्धु है, बादल सा वरदानी है ।।५।।
घोर निराशा की नथुनी में, आशाओं का मोती है।
लक्ष्यवेध की कला जानता, आँख न इसकी सोती है ।।
यह अभिमन्यू सरीखा योद्धा, वीर कर्ण सा दानी है ।।६।।
बलिदानों से हमको मिला देश हमारा 👇https://aryaveerdal.in/balidano-se-hamko-mila-desh-hamara/

