ब्रह्मचारी अरुणकुमार “आर्यवीर” (पूर्वनाम : माईकल डिसोझा)

0
64

जन्मतिथि : 8/5/1964

जन्मस्थान : मुम्बई, भारत।

माता : श्रीमति रोजी डिसोझा,
धर्मपिता : स्व. डॉ. त्रिलोकीनाथ जी क्षत्रिय

अध्ययन : मुम्बई में कॉमर्स की स्नातकोत्तर शिक्षा अपूर्ण छोड़ आय.टी.आय. का मोटर मैकेनिक कोर्स किया, सन् 1986 में वैराग्य प्राप्ति के अनन्तर गृहत्याग कर वारकरी, कबीर, नाथ सम्प्रदाय आदि में ज्ञानपिपासु बन सत्यान्वेषण के लिए भ्रमण कर 1988 में नासिक त्र्यम्बकेश्वर में दशनाम नागा संन्यासी अटल आखाडे से संन्यास ग्रहण। इसी वर्ष मुम्बई में पवई रामाश्रम में लगे आर्यवीर दल के एक शिविर के माध्यम से आर्य समाज से परिचय एवं प्रवेश। स्व. कैप्टन देवरत्न आर्य तथा आर्य समाज खार के संस्थापक श्री ओमप्रकाश आर्य आदि के अर्थ सहयोग से एक माह तक आर्यवीर दल का प्रशिक्षण प्राप्त कर मुम्बई के विभिन्न स्थानों पर एक वर्ष तक वीर दल की शाखाओं का गठन एवं प्रशिक्षण। 1989 में दर्शन योग महाविद्यालय में प्रवेश प्राप्त कर योग दर्शन एवं न्याय दर्शन का पूज्य स्वामी विवेकानन्द जी से अध्ययन। गुरुकुल होशंगाबाद में रहते हुए सामान्य व्याकरण का अध्ययन। वर्तमान में पाणिनीया पाठशाला में रहते हुए आर्ष शोध संस्थान अलियाबाद तेलंगाना में रहते व्याकरण का अध्ययन एवं वैदिक धर्म प्रचार चल रहा है..!!

कार्यक्षेत्र :-

1) सन् 1988 से अब तक भारत के विभिन्न प्रान्तों में सैकड़ों शिविरों के माध्यम से आर्यवीर दल का कार्य

2) विभिन्न विषयों पर 45 से भी अधिक छोटी-बड़ी पुस्तकों का सम्पादन प्रकाशन एवं निःशुल्क वितरण।

3) लगभग 13 वर्षों तक पहले त्रैमासिक पश्चात् मासिक पत्रिका सांतसा का सम्पादन प्रकाशन एवं निःशुल्क वितरण।

4) ग्यारह ऑडियों कैसेटों में अपने स्वर में आर्यवीर दल, युवा-चरित्र-निर्माण, ऋषि गाथा, ईशभक्ति के भजन, भारत गौरव गान, विवेक-वैराग्य श्लोक, संस्कृत गीतिकाएं तथा सुप्रसिद्ध आर्यवीर दल व्यायाम संगीत का निर्माण। इसके अलावा पंडित जयगोपाल विरचित सत्यार्थ प्रकाश कवितामृत का ग्यारह समुल्लासों तक का लगभग 40 घण्टों में ससंगीत ध्वनिमुद्रण जिसके 5 समुल्लासों का लोकार्पण भी हुआ है.. यह सब कार्य समाज में निःशुल्क वितरण किया गया है।

5) विभिन्न गुरुकुलों में आर्ष क्रम से पढ़नेवाले छात्रों को वर्षों तक छात्रवृत्ति उदार श्रेष्ठियों से प्राप्त करवाई जिनसे कई आचार्यों का निर्माण हुआ है.. जो विभिन्न गुरुकुलों में अध्यापनादि में संलग्न हैं।

6) दर्शन योग महाविद्यालय तथा वानप्रस्थ साधक आश्रम रोजड़ में लगनेवाले योग शिविरों में प्रारम्भ से ही अब तक लगातार क्रियात्मक ध्यान योग का प्रशिक्षण अनुभव है। भारत के विभिन्न प्रान्तों में वैदिक पद्धति से ध्यान योग प्रशिक्षण के शिविरों में प्रशिक्षण।

7) गुरुकुलों में अध्ययन काल में विभिन्न प्रान्तों में सुसम्पन्न पारायण यज्ञों में मन्त्रपाठ का सौभाग्य तथा अनेकों यज्ञों का संचालन सौभाग्य भी प्राप्त हुआ। कालान्तर में स्व.आचार्य ज्ञानेश्वर जी की शैली से अनेकों स्थलों पर दैनिक यज्ञ प्रशिक्षण शिविरों में भी प्रशिक्षण दिया है।

8) 15 से भी अधिक वर्षों से सांतसा नामक वेबसाइट तथा फेसबुक आदि शोशल नेटवर्क साईट द्वारा वैदिक सिद्धान्तों का प्रचार-प्रसार।

9) विगत आठ वर्षों से आर्ष तिथि पत्रक (सौर एवं चान्द्रमासों का पंचांगयुक्त कैलेण्डर) का प्रकाशन एवं निःशुल्क वितरण।

10) एंड्रॉयड तथा IOS दूरभाष संयंत्रों के लिए सांतसा (santasa) एप का निर्माण जिसकी लिंक निम्न है

Santsa Application
https://play.google.com/store/apps/details?id=com.santsa

Application is live to download from AppStore.
https://apps.apple.com/in/app/santasa/id1506511238

प्रकाशन:-

  1. सांतसा पत्रिका का लगभग 13 वर्षों तक प्रकाशन इस में आधुनिक प्रबंधन विधाओं के समकक्ष वैदिक प्रबंधन विधाओं का प्रकाशन होता आया है.. यह पत्रिका समाज में निःशुल्क वितरण की गई थी..
  2. विभिन्न आध्यात्मिक विषयों पर पुस्तकों का प्रकाशन हो चुका है.. जिसमें किशोर चरित्र निर्माण शिविरों में प्रयुक्त होनेवाली आर्यवीर गीतांजलि, आर्यवीर दिनचर्या जैसी पुस्तकों के विगत 25 वर्षों में 12 से भी अधिक संस्करण छापे जा चुके हैं इस प्रकाशन विभाग में वैदिक साधना पद्धति ध्यान सीखने वाले लोगों में लोकप्रिय हो चुकी है.. आर्ष गुरुकुलीय शिक्षा पद्धति में अष्टाध्यायी प्रवेश तथा गत वर्ष प्रकाशित अष्टाध्यायी मूल सूत्र उपयोगी रही है.. लगभग 35 सूक्तों के संग्रह युक्त वेदपाठ नामक पुस्तक भी नियमित वेदपाठ करने के इच्छुक महानुभाव तथा पुरोहित वर्ग द्वारा प्रशंसित है.. सत्यार्थ प्रकाश के प्रथम दश समुल्लासों के सिद्धांतों को युवकों को ध्यान में रख कर लिखी पुस्तक वैदिक सिद्धान्तावली भी लोकप्रिय रही है.. इनके अलावा गृहस्थ धर्म परिचायिका जैसी अनेकों पुस्तकों का प्रकाशन एवं निःशुल्क वितरण हुआ है

यह समस्त प्रकाशन समाज में सर्वथा निःशुल्क ही वितरित होता आया है आगामी प्रकाशन तीन पुस्तकों का रहेगा.. 1. संस्कृत की अनुवाद सम्बन्धी तथा 2. वैदिक ज्योतिष की एक पुस्तक 3. दयानन्द काव्यप्रकाश संगीतमय श्रीराम कथा तथा संगीतमय श्रीकृष्ण कथा इन पुस्तकों के प्रकाशन की योजना है.. इन तीनों काव्यों का ससंगीत ध्वनि मुद्रण भी कराया जा रहा है.. इन प्रकाशन कार्यों में सवा लाख रुपए तक की संभावित लागत आनी है..!!

योग शिविर :- आचार्य ज्ञानेश्वर जी के जीवित रहने तक रोजड़ गुजरात में लगे हुए प्रत्येक क्रियात्मक ध्यान योग शिविर में वैदिक पद्धति से ध्यान योग प्रशिक्षण का अवसर पाया.. विगत दस से भी अधिक वर्षों से स्वतंत्र रूप से आर्य समाज में या व्यक्तिगत आयोजनों या पारिवारिक आयोजनों में भी ध्यान योग शिविरों में प्रशिक्षण दिया गया है..!!

यज्ञ प्रशिक्षण शिविर :- आचार्य ज्ञानेश्वर जी की शैली से आर्यसमाजेतर जनों को दैनिक अग्निहोत्र प्रशिक्षण द्वारा अनेकों शिविरों में हजारों याज्ञिकों का निर्माण किया गया है..!! इस प्रकार के शिविर आयोजित कर जन जन तक घर घर तक यज्ञ की अग्नि पहुंचाई का सकेगी..!!

किशोर चरित्र निर्माण शिविर :- विगत 30 से भी अधिक वर्षों से प्रतिवर्ष अनेकों शिविरों में आर्यवीर दल के माध्यम से भारत में अनेकों राज्यों में किशोर एवं युवा चरित्र निर्माण कार्य किया गया है.. जो इस वर्ष कोराेना महामारी के चलते नहीं हो पाया..!!

ध्वनि मुद्रण कार्य :- इस के दो प्रारूप हैं.. अपने ही घर किसी ध्वनि मुद्रण यंत्र या चलभाष यंत्र से किया गया तथा दूसरा है किसी स्टूडियो को आरक्षित कर उस में स संगीत ध्वनि मुद्रण कराना.. दोनों ही प्रकार से प्रचुर कार्य अब तक किया जा चुका है..

प्रथम प्रारूप में आर्याभिविनय, समाधि, कर्मफल सिद्धांत, यजुर्वेद के पांच सूक्तों का दयानंदीय भाष्य समेत ध्वनि मुद्रण किया गया है जिसे अनेकों वेब साइटों से प्रचारित किया गया है.. इसी प्रकार पाणिनीय अष्टाध्यायी धातुपाठ आदि का ध्वनि मुद्रण सैकड़ों संस्कृत अध्येताओं ने लाभ उठाया है..

इस प्रारूप की आगामी योजना :- चारों वेदों का आर्ष भाष्य सहित ध्वनि मुद्रण करना एवं इंटरनेट पर उपलब्ध कराना यह साढ़े चार से पांच वर्ष की कार्य योजना है.. इस के लिए एक ध्वनि रोधी कक्ष याने साउंड प्रूफ रूम मेरे आवास में ही निर्माणाधीन है.. जिसकी लागत एक लाख तक संभावित है..!!

द्वितीय प्रारूप में अब तक 40 से भी अधिक घंटों का संगीतमय पद्य रूप में ध्वनि मुद्रण कराया एवं समाज में बिना मूल्य वितरित किया गया है.. इस में देशभक्ति, आर्यसमाज, आर्यवीर दल, महर्षि दयानन्द जी, संस्कृत गीतिकाए एवं श्लोक, संध्या हवन एवं दिनचर्या के मंत्र इन सब के अलावा सत्यार्थ प्रकाश कविता में लगभग 35 घंटों से भी अधिक का गायन स्टूडियो से कराया गया है

इस प्रारूप की आगामी योजना :- 1. दयानन्ददयानन्द काव्य प्रकाश जो गद्य एवं संगीतमय पद्य एक धारावाही जीवन चरित्र है का ध्वनि मुद्रण, यह लगभग पांच से भी अधिक घंटों की अवधि युक्त होगा.. 2. संगीतमय श्रीराम कथा जो चार से भी अधिक घंटों की समयावधि की होगी, 3. संगीतमय श्रीकृष्ण कथा यह भी लगभग तीन घंटे समयावधि की होगी.. 4. सत्यार्थ प्रकाश कवितामृत के अंतिम तीन समुलास जो अवशिष्ट है को पूरा करना है.. इन सभी प्रकल्पों में अनुमान से चार से पांच लाख रुपए अनुमानित व्यय होने हैं..!!

इन दोनों प्रारूपों में निर्मित सामग्री को दृश्य श्रव्य याने वीडियो बनाकर समाज में प्रसार करने की समय की मांग है तथा संबंधित व्यक्तियों से सहाय की अपेक्षा है..!!

Santasa App :- एंड्रॉयड तथा आय आे एस दोनों प्रारूपों के लिए सांतसा एप वैदिक धर्म के प्रचार प्रसार हेतु लोकार्पित है.. जिसमें निम्न विषय की सामग्री है..

  1. दैनिक एवं साप्ताहिक अग्निहोत्र, भावार्थ सहित वैदिक संध्या, अर्थ सहित प्रातः जागरण एवं शयन वेदमंत्र सार्थ भोजन आरंभ एवं समापन मंत्र,
  2. विभिन्न विषयों पर आलेख एवं पठनीय पुस्तकें PDF रूप में
  3. विभिन्न विषयों पर चित्रमय सुविचारों की लंबी श्रृंखला प्राप्ति के लिए..!!
  4. वैदिक धर्म, आर्य समाज, महर्षि दयानंद अग्निहोत्र, संस्कार, प्रेरक महापुरुष से संबंधित चित्र प्रदर्शनी के लिए..!!
  5. देश धर्म जाति हेतु अपने जीवन का सर्वोच्च बलिदान देनेवाले प्रसिद्ध तथा अप्रसिद्ध हुतात्माओं का सचित्र एवं संक्षिप्त जीवनवृत्त जानने के लिए..!!
  6. घर बैठे देववाणी संस्कृत संभाषण सीखने के लिए..!!
  7. महर्षि दयानंद जी सरस्वती लिखित कालजयी अमर ग्रंथ सत्यार्थ प्रकाश स्वामी विद्यानन्द जी की व्याख्या सहित गद्य श्रव्यकणिकाएँ एवं कवि पंडित जयगोपाल जी विरचित संगीतमय पद्य रूप सत्यार्थ प्रकाश श्रव्यकणिकाएँ सुनने हेतु..!!
  8. चरित्र निर्माण, राष्ट्रभक्ति, ईश्वरभक्ति, महर्षि दयानंदादि महापुरुष, संस्कृत गीतिकाये एवं श्लोकादि, आर्य समाज, आर्य वीर दल संबंधित शताधिक सुश्राव्य कर्णप्रिय संगीतबद्ध गीतमाला के लिए..!!

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here