ऊँची-ऊँची पहाड़ों की चट्टानों को तोड़ के ।
चढ़ जाते हैं आर्य बहादुर दौड़-दौड़ के ।।
चार वेद, मनुस्मृति, ऋषियों का यह कहना है।
सीने उपर चोट लेना क्षत्रियों का गहना है।
रहना है अगर शान से आ दुश्मन को मरोड़ के ।
टूटे हुए आयामों के टुकडे जोड़-जोड़ के ।। १ ।।
संगठन गीत 👇🏻 https://aryaveerdal.in/sangthan-geet/
बारह साल पेट भरके रोटी तक ना खाई थी।
अकबर के दरबार बीच गरदन ना झुकाई थी।
स्याही नहीं लाई बापारावल के चित्तौड़ के ।
आखिर मुगल सेना भागी घाटी छोड़-छोड़ के ।। २ ।।
इकला था वो वीर वो कर ना उसका हजार सके।
अनेकों ही हिन्दू मुस्लिम बदला नहीं तार सके।
चोट नहीं मार सके उस अमरसिंह राठौर के ।
इतिहासों के अन्दर लगा दाग ‘अर्जुन’ मोड़ के ।। ३।।
आर्यवीर गान 👉🏻 https://aryaveerdal.in/आर्यवीर-गान/

