आर्य समाज बुढी बावल के तत्वाधान में आयोजित आर्य वीर दल के चरित्र निर्माण शिविर में आज शिविरार्थी बालकों का यज्ञोपवीत संस्कार संपन्न हुआ । यज्ञोपवीत संस्कार समारोह को संबोधित करते हुए शिविर अध्यक्ष रामकृष्ण शास्त्री ने कहा की यज्ञोपवीत और चोटी हमारे धर्म के चिन्ह हैं ,जिन्हें हमें धारण करना चाहिए , हमारे ऊपर तीन ऋण है, माता-पिता का ऋण ,ऋषियों का ऋण, देवताओं का ऋण ,प्रत्येक मनुष्य के ऊपर यह तीन ऋण होते हैं ,जिन्हें उतारने का प्रयास हमें करना चाहिए, इस अवसर पर उन्होंने बालको से संकल्प दिलवाया कि वे जीवन में कभी किसी भी प्रकार का नशा नहीं करेंगे ,दूर्व्यसनो से बचकर रहेंगे ,हमेशा अच्छे कार्य करते हुए अपने जीवन को सफल बनाएंगे। यज्ञोपवीत संस्कार समारोह में आर्य समाज के अनेक पदाधिकारी उपस्थित थे ।

इस प्रशिक्षण शिविर में सभी आर्य वीरों को सर्वांग सुंदर व्यायाम सूर्य नमस्कार भूमि नमस्कार जुड़े कराटे तलवार भाला लाठी दंड बैठक मलखम कमांडो आदि का सुयोग प्रशिक्षक द्वारा प्रशिक्षण दिया गया। राजस्थान के प्रांतीय अध्यक्ष भवदेव शास्त्री और अन्य विद्वानों द्वारा बौद्धिक प्रशिक्षण दिया गया। यह शिविर रामकृष्ण शास्त्री जी के निर्देशन में चला एवं रामानंद आर्य व उनकी पूरी टीम की तरफ से शिविर की पूरी व्यवस्था रही।


