जीवन में नया उभार उभार यह शिविर आर्यवीरों का।
चार बजे सब उठना सीखें कसें लंगोट कुछ करते दीखें।
दण्ड बैठक आसन धार हो धार यह शिविर …. …. …. ।।१।।
नहा-धोकर के हवन रचावें मिल प्रेम से खाना खावें ।
अन्नपते उच्चार-उच्चार यह शिविर …. …. …. ।।२।।
जहाँ रहें वहाँ करें सफाई पढ़ने की जा विधि बताई।
जिसे समझें युवक भार हो भार यह शिविर …. …. …. ।।३।।
बौद्धिक देकर बुद्धि बढ़ावें जीवन उपयोगी बात बतावें ।
हो युवकों का उद्धार – उद्धार यह शिविर …. …. …. ।।४।।
लाठी के व्यायाम सिखावें खेलने के भी ढंग बतावें ।
जिससे बढ़े आपस में प्यार हो प्यार यह शिविर …. …. ….।।५।।
रात्रि को मनोरंजन होता मंत्र बोलकर हर कोई सोता ।
अन्त में धनकुमार कुमार यह शिविर …. …. ….।।६।।

