सादर प्रणाम,
मुझे गर्व है कि मैं वैदिक धर्म और संस्कृति की ध्वजवाहक संस्था ” आर्य समाज ” का सदस्य हूं ,
हम जातिप्रथा, सम्प्रदायवाद को नहीं मानते हैं और एक ईश्वर और एक उपासना पद्धति ( यज्ञ ) पर विश्वास करते हैं।
हम सामाजिक विषमता और आध्यात्मिक पाखंड को नहीं मानते हैं । हमारे पुरखों ने देश की आजादी है सबसे अधिक बलिदान दिया है। हम देश के समग्र विकास के लिए कृत संकल्पित हैं।




आप भी वैदिक धर्म और संस्कृति को स्वीकार कर आर्य समाज के प्राथमिक सदस्य बनें व अपने परिवार के सभी सदस्यों और मित्रों को भी बनाएं तथा कृण्वंतोविश्वार्यम् ( सारे संसार को श्रेष्ठ बनाएं )।
सादर
उप प्रधान संचालक
सार्वदेशिक आर्य वीर दल
( उत्तर पूर्व भारत )
नई दिल्ली

