भूमिका
भारतीय संस्कृति में यज्ञ का विशेष महत्व है। यह न केवल आध्यात्मिक उन्नति का साधन है, बल्कि पर्यावरण शुद्धि, मानसिक शांति और सामाजिक समरसता का भी प्रतीक है। इसी क्रम में ३० मार्च २०२५ (विक्रम संवत् २०८२, चैत्र शुक्ल प्रतिपदा) को आर्य वीर दल जयपुर, समस्त आर्य समाज एवं पतंजलि योग समिति के तत्वावधान में १५१ कुण्डीय नव संवत्सरेष्टि यज्ञ महोत्सव का भव्य आयोजन किया जा रहा है। यह आयोजन सामुदायिक भवन, हनुमान नगर, वैशाली नगर, जयपुर में संपन्न होगा।
इस महान यज्ञ का उद्देश्य सत्य सनातन वैदिक भारतीय नववर्ष एवं आर्य समाज स्थापना दिवस को आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक रूप से मनाना है। इस अवसर पर वैदिक विद्वान, साधु-संत, सामाजिक एवं राजनैतिक हस्तियां भी उपस्थित रहेंगी।
यज्ञ का महत्व
ऋग्वेद में यज्ञ को श्रेष्ठतम कर्म बताया गया है –
“यज्ञो वै श्रेष्ठतमं कर्म”
यज्ञ न केवल आत्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करता है, बल्कि पर्यावरण संतुलन एवं समाज कल्याण का भी माध्यम है। यह यज्ञ महर्षि दयानन्द सरस्वती के सिद्धांतों पर आधारित होगा, जिन्होंने वैदिक परंपरा को पुनर्जीवित कर समाज को नई दिशा दी थी।
कार्यक्रम का स्वरूप
यज्ञ एवं प्रवचन
यज्ञ का शुभारंभ सायं ३:३० बजे से होगा। इस दौरान श्रद्धालु वैदिक मंत्रों की गूंज में अपनी आहुति प्रदान करेंगे। यज्ञ के उपरांत सुमधुर भजन एवं वैदिक विद्वानों के सारगर्भित प्रवचन होंगे, जिनमें यज्ञ, वेदों एवं सनातन संस्कृति की महिमा पर प्रकाश डाला जाएगा।

कार्यक्रम का विवरण
तिथि एवं समय
- दिनांक: रविवार, ३० मार्च २०२५
- समय: सायं ३:३० से ७:३० बजे तक
- स्थान: सामुदायिक भवन, हनुमान नगर, सी-ब्लॉक, दशरथ मार्ग, वैशाली नगर, जयपुर
कार्यक्रम क्रम
- सायं ३:३० से ५:३० बजे तक – यज्ञ
- सायं ५:३० से ६:०० बजे तक – भजन संध्या
- सायं ६:०० से ७:३० बजे तक – प्रवचन
- कार्यक्रम समापन के पश्चात – ऋषि लंगर (भोजन प्रसादी)
ऋषि लंगर
कार्यक्रम के अंत में ऋषि लंगर का आयोजन किया जाएगा, जिसमें सभी श्रद्धालु भोजन प्रसादी ग्रहण करेंगे।
सम्माननीय अतिथि एवं विद्वान
इस यज्ञ में देशभर के प्रतिष्ठित विद्वान एवं संतजन मार्गदर्शन प्रदान करेंगे।
यज्ञ ब्रह्मा:
- आचार्य सोमदेव आर्य (अध्यक्ष, गुरूकुल मलारना चौड़)
मार्गदर्शन एवं आशीर्वाद:
- स्वामी सुमेधानंद सरस्वती (पूर्व सांसद, सीकर)
आमंत्रित विद्वज्जन:
- आचार्य उषर्बुद्ध
- आचार्य रवि शंकर आर्य
- आचार्य सर्वमित्र आर्य
- आचार्य भवदेव शास्त्री
- डॉ. योगेश शास्त्री
भजन संगीतज्ञ:
- आचार्य दीपक शास्त्री
- आचार्या श्रुति शास्त्री
आयोजन समिति एवं प्रमुख आयोजक
इस महायज्ञ को सफल बनाने के लिए अनेक समर्पित व्यक्तियों ने अपनी भूमिका निभाई है।
कार्यक्रम संयोजक:
- वेदपाल शास्त्री (प्रधान, आर्य प्रतिनिधि सभा राजस्थान)
- देवेंद्र शास्त्री
- डॉ. बजरंग सिंह शेखावत
- विकास बागड़ा
- ब्रह्म प्रकाश आर्य
- सुभाष आर्य
- डॉ. के. के. वशिष्ठ
- हनुमान शर्मा
आयोजन समिति:
इसमें अनेक वैदिक प्रचारक, आर्य समाज के कार्यकर्ता एवं सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हैं, जिनमें प्रमुख हैं –
- ब्रह्म प्रकाश आर्य
- सुनिल अरोड़ा
- सुभाष आर्य
- पं. अंकुश आर्य
- आशीष मिनोचा
- डॉ. अनामिका शर्मा
- वेद प्रकाश आर्य
- बंशीधर आर्य
- राजेश कुमावत
- हेमन्त पचौरी
- विनय झा
- रमेश आर्य
- सतीश मित्तल
- नरदेव आर्य
- महेन्द्र आर्य
- दीपक गर्ग
- अनिल आर्य
- गुलाब यादव
- गोपाल शर्मा
- रामानुज आर्य
- आर्य शिव राठौड़
- लक्ष्य आर्य
- विजय आर्य
- दीपक शर्मा
- कृष्णा मुरारी सदाका
- अतुल वर्मा
- राजीव आर्य
- श्रीमती सरस्वती चौधरी
- श्रीमती सुषमा यादव
- मुकेश प्रजापत
- संतोष उपप्रैती
- चेतन सिंह
- मदन मोहन पाण्डे
- मदन लाल सैनी
- प्रदीप टिबडेवाल
- ब्रजेश आर्य
यजमान बनने हेतु संपर्क करें
जो श्रद्धालु यजमान बनना चाहते हैं, वे निम्नलिखित नंबरों पर संपर्क कर सकते हैं –
📞 7891800808, 8005618025, 9166519866, 7733090306, 9352547258, 9887889707
सार्वदेशिक आर्य वीर दल, जयपुर द्वारा आयोजन
यह आयोजन सार्वदेशिक आर्य वीर दल, जयपुर द्वारा आयोजित किया जा रहा है, जिसमें आर्य समाज वैशाली नगर एवं पतंजलि योग समिति, जयपुर का सहयोग रहेगा।
निष्कर्ष
१५१ कुण्डीय नव संवत्सरेष्टि यज्ञ महोत्सव भारतीय संस्कृति, परंपरा एवं वेदों के प्रति श्रद्धा को प्रकट करने का अनुपम अवसर है। यह न केवल आध्यात्मिक जागृति का माध्यम बनेगा, बल्कि समाज को वैदिक मूल्यों से जोड़ने की प्रेरणा भी देगा।
हम सभी धर्मप्रेमी सज्जनों से आग्रह करते हैं कि इस महायज्ञ में भाग लें, यज्ञ का पुण्य प्राप्त करें एवं समाज कल्याण के इस पवित्र कार्य में अपना योगदान दें।
“कृण्वन्तो विश्वमार्यम्”
॥ ओ३म् ॥

