कुशलगढ़ के दयानंद सेवाश्रम में जनेऊ संस्कार और सम्मान समारोह, देश, धर्म और सनातन संस्कृति को बचाने का आह्वान
महर्षि दयानंद सेवाश्रम में रविवार को 100 आदिवासी विद्यार्थियों का जनेऊ संस्कार और सम्मान समारोह आयोजित किया गया। मुख्य अतिथि दयासागर थांदला, विशिष्ट अतिथि आर्य समाज के प्रतिनिधि जीववर्धन शास्त्री, कुशलगढ़ आश्रम के प्रधान धर्मेंद्र आर्य, पार्थ दामा, जीतमल पणदा, रमेशचंद्र अहारी, एमबीडी कॉलेज के प्राचार्य महेंद्र कुमार देपन, एसीबीईओ भीमजी सुरावत, भामाशाह मुकेश अग्रवाल, समाजसेवी विनोद सोनी, एडवोकेट धर्मेंद्र कंसारा, समाजसेवी कलेश तंबालिया, टीएडी परियोजना अधिकारी कचरूलाल गायरी रहे। सुबह 9 बजे हवन के साथ जनेऊ संस्कार कार्यक्रम शुरू हुआ। लव कुमार शास्त्री व दिलीप शास्त्री के नेतृत्व में हवन किया गया। उसके बाद 100 विद्यार्थियों ने जनेऊ धारण किए। आश्रम सदस्य भरतसिंह डिंडोर व्याख्याता, माधवलाल कटारा शिक्षक का कुशलगढ़ दयानंद सेवा आश्रम में जनेऊ संस्कार कार्यक्रम में शामिल आदिवासी बच्चे, संत, महात्मा और आश्रम के पदाधिकारी।
राजकीय सेवा से सेवानिवृत्त होने पर शॉल ओढ़ाकर, साफा व माल्यार्पण कर किया गया सम्मान
राजकीय सेवा से सेवानिवृत्त होने पर शॉल ओढ़ाकर, साफा व माल्यार्पण कर सम्मान किया गया। दोनों ने शेष जीवन आश्रम संचालन में पूरा सहयोग देने का वादा किया। नीरज सोनी का लैब टेक्नीशियन में चयन होने पर सम्मान किया। अतिथियों ने कहा कि आर्य समाज देश, धर्म और वैदिक सनातनी संस्कृति को बचाने में जुटा हुआ है। आर्य समाज देश-विदेश में अपना परचम ऊंचा कर रहा है। आर्य प्रतिनिधि सभा के मंत्री आचार्य जीववर्धन शास्त्री ने बताया कि आदिवासी क्षेत्र के अंदर लगातार संस्कार और शिक्षा के माध्यम से जनजाति वर्ग में पिछले 60 वर्षों से सक्रिय है और इस आश्रम में पढ़ने वाले काफी विद्यार्थी गांव गांव धाणी-धाणी नगरों में गरीब आदिवासी बच्चों को संस्कार व शिक्षा देने का कार्य कर रहा है। आर्य समाज एक ऐसी संस्था है जो भारत को विश्व गुरु व विकसित भारत के संकल्प को पूरा करने का कार्य कर रही है। प्राचार्य महेंद्र कुमार देपन ने कहा कि इस क्षेत्र के विकास के लिए अच्छी शिक्षा और संस्कार के लिए हमेशा आगे आना चाहिए। आचार्य दयासागर शास्त्री थांदला ने बताया कि आज के समय में विद्यार्थी को 16 संस्कार में से मात्र तीन संस्कार ही याद हैं। दयानंद सेवाश्रम ही एक ऐसी संस्था है जो 16 संस्कारों का विद्यार्थियों को अध्ययन करवाती है
और उसके माध्यम से विद्यार्थी सफल जीवन की कामना करते हैं। कार्यक्रम में प्रधानाचार्य रमेश अहारी, सामाजिक कार्यकर्ता केसरसिंह डामोर, समाज सेवी अजय निगम, पथिक मेहता, भामाशाह रमनसिंह चरपोटा, लाल सिंह डिंडोर, शंभू सिंह डामोर, स्कूल व्याख्याता राकेश देवदा, अमर सिंह डामोर, चरण सिंह डामोर, लालसिंह मुनिया, रमेश चंद्र सुरावत, लोकेश अड़, सुखलाल
मईड़ा, संजय डामोर, बिजिया मईड़ा, शिवलाल डामोर, बहादुर सिंह भाभोर, कैलाश चंद्र राणा, सवेसिंह डोडियार, दलसिंह डामोर, ि मीठा डामोर, भावचंद कटारा, आश्रम के सदस्य, विद्यार्थी, ि अभिभावक थांदला, बांसवाड़ा, भामल आश्रम के सदस्य मौजूद प्र थे। संचालन दिनेश खड़िया और रमेश चंद्र सुरावत ने किया। आभार आश्रम प्रधान धर्मेंद्र आर्य ने जताया।

