आर्यवीर वीरांगना दल टंकारा गुजरात , आर्य समाज के युवा इकाई

0
20

नमस्ते

उपरोक्त जो यज्ञ करते बच्चे हैं वह सारे ऋषि जन्मभूमि यानी कि टंकारा गांव में स्थित आर्य समाज टंकारा का वीडियो है । यहां पर सन 1984 में आर्य वीर दल की स्थापना हुई थी तब से लेकर आज तक यहा शाखा प्रतिदिन लगती है। और प्रतिवर्ष छुट्टियों में आर्य वीरांगनाओं और आर्य वीरों का शिविर भी लगाते हैं। आज हमारी आर्य समाज से लगभग छोटे बड़े 100 से भी अधिक आर्यवीर हैं। जो बड़े हो चुके हैं वह सारे आर्य समाज का कार्य कार्यभार भी संभालते हैं और एक तरह से यह भी कह सकते हैं। कि आर्य समाज के सारे पदाधिकारी आर्य वीर दल से ही आए हुए हैं। और सारे के सारे पदाधिकारी काले बाल वाले हैं। और प्रत्येक गतिविधियों में आर्य समाज टंकारा की ओर से जो चलती है। उन सभी प्रवृत्तियों को चलाने में भी यही आर्यवीर , वीरांगना बहुत समय निकालते हैं। और पूरे लगन से आर्य समाज से जुड़े हुए हैं। बहुत सारे आर्यवीर अपने घर पर भी दैनिक यज्ञ करते हैं। और इन आर्यवीर को वैदिक सिद्धांत का भी बहुत अच्छा ज्ञान होता है। तो एक तरह से हम कह सकते हैं यह आर्य समाज आर्य वीर दल द्वारा संचालित हैं ।

जिस संगठन में नया खून नहीं आता वह संगठन बूढ़ा हो जाता है । उसी तरह आर्य समाज में आर्य वीर दल का स्थान रीड की हड्डी की तरह है । क्योंकि बिना रीढ़ की हड्डी के शरीर की कल्पना करना मुश्किल है। आज सारे भारतवर्ष में सभी आर्य समाजो मैं जो कार्यकर्ता के रूप में अपनी सेवा दे रहे हैं । वह कहीं ना कहीं आर्य वीर दल से जुड़ा हुआ है। उसे आर्य वीर दल से प्रेरणा कहीं ना कहीं से प्राप्त हुआ है। आर्य वीर दल के भट्टी में तप कर निकला हुआ व्यक्ति आर्य समाज का मजबूत कार्यकर्ता बनता है।देश में रजिस्टर्ड 5000 से भी अधिक आर्य समाज हैं । आज युवा इकाई को आर्य समाज से जुड़ने के लिए आर्य वीर दल से अच्छा माध्यम नहीं है। सभी आर्य समाजो को आर्य वीर दल के क्षेत्र में योगदान देना चाहिए।

इस बात को हमें याद रखना चाहिए यदि हमने एक बच्चे को आर्य समाज से जोड़ लिया तो हमने 50 साल के लिए एक कार्यकर्ता निकाल लिया।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here